Leh Crisis Update : लद्दाख की राजधानी लेह, जो हर साल 7 से 8 महीने पर्यटकों से गुलजार रहती है, इस समय पूरी तरह सूनी पड़ी है। 24 सितंबर को हुई हिंसा के 16 दिन बाद भी यहां सामान्य स्थिति लौट नहीं पाई है। बाजार खाली हैं, होटल्स और गेस्टहाउस वीरान पड़े हैं, और टैक्सी स्टैंड्स पर गाड़ियां धूल फांक रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन यह दावा कर रहा है कि “सब नॉर्मल” है।
ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन की अध्यक्ष रिगजिन वाग्मो लेचिक ने भावुक होते हुए कहा, “हमें नॉर्मल कहकर क्यों छल रहे हैं? हमारे होटल्स खाली हैं, हमारी आमदनी खत्म हो गई है, यह कैसे सामान्य हो सकता है?” उनका कहना है कि पहलगाम हिंसा से जहां 50% पर्यटन प्रभावित हुआ था, वहीं लेह की हिंसा ने यह नुकसान 80% तक बढ़ा दिया है। इलाके के करीब 2000 होटल्स और गेस्टहाउस खाली पड़े हैं। 5-10 हजार रुपये किराए वाले कमरे आज 500-1000 रुपये में भी नहीं भर पा रहे हैं।
24 सितंबर की हिंसा के बाद इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी, जिसे गुरुवार आधी रात को बहाल किया गया, लेकिन इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
लेह में अभी भी धारा 163 लागू है। पांच से अधिक लोग एक साथ खड़े नहीं हो सकते। स्कूल खुले हैं, पर कक्षाएं सूनी हैं। सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनशन के दौरान हुई हिंसा के बाद से माहौल असामान्य बना हुआ है।
लेह अपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे ने कहा, “हम प्रशासन से पूछ रहे हैं कि फायरिंग का आदेश किसने दिया, लेकिन 16 दिन बीतने के बाद भी जवाब नहीं मिला।” हिंसा में चार युवकों की जान गई, और 39 लोग अभी भी हिरासत में हैं।
लेह टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष थिंलेस नामग्याल ने बताया कि 24 सितंबर के बाद से एक भी बुकिंग नहीं मिली। करीब 6,000 टैक्सी ऑपरेटर बेरोजगार हो गए हैं। जिन लोगों का पूरा साल पर्यटन पर निर्भर करता है, उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में बर्फबारी शुरू हो जाएगी, जिससे लेह लगभग बंद हो जाएगा। ऐसे में कमाई का यह सीजन पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए न्यायिक जांच की मांग उठ रही है। SDM नुब्रा मुकुल बेनीवाल को जांच की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन लेह अपेक्स बॉडी ने इसे खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। कुछ स्थानीय नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि फायरिंग का आदेश स्थानीय प्रशासन ने नहीं दिया था, इसलिए इसके पीछे किसकी भूमिका है, यह जानने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच जरूरी है।
लेह में हालात सामान्य नहीं हैं। पर्यटन उद्योग ठप है, लोगों की आजीविका खतरे में है, और सरकार के “नॉर्मल” के दावे स्थानीय लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे हैं। प्रशासन को चाहिए कि गंभीरता से न्यायिक जांच कराए, इंटरनेट व अन्य सेवाओं को स्थायी रूप से बहाल करे और पर्यटन को पुनर्जीवित करने के प्रयास शुरू करे।
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