Darjeeling Black Deer: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के कार्शियांग वन क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। डाउहिल के हरे-भरे पाइन जंगल में एक बार फिर दुर्लभ काले हिरण को देखा गया है। इस साल जनवरी की शुरुआत में भी इस असाधारण जीव की मौजूदगी दर्ज की गई थी। अब कुछ महीनों के अंतराल पर दोबारा दिखाई देने से वन विभाग के अधिकारी उत्साहित हैं। साथ ही, इस दुर्लभ वन्यजीव की सुरक्षा को लेकर सतर्कता भी बढ़ा दी गई है।
ट्रेकिंग के दौरान पर्यटक ने कैमरे में कैद किया हिरण
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले एक पर्यटक बाघिरा ट्रेल जॉय राइड पूरी करने के बाद डाउहिल के घने जंगल में ट्रेकिंग कर रहा था। इसी दौरान उसकी नजर एक काले रंग के हिरण पर पड़ी। जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमते इस अनोखे जीव को देखकर पर्यटक हैरान रह गया। उसने तुरंत कैमरा निकाला और हिरण की कई तस्वीरें खींच लीं। तस्वीरें सामने आने के बाद इलाके में इस दुर्लभ वन्यजीव को देखने की उत्सुकता बढ़ गई।
क्या है काले हिरण के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य?
वन अधिकारियों के मुताबिक, इस हिरण का असामान्य रंग मेलनिज्म नामक आनुवंशिक बदलाव के कारण हो सकता है। इस स्थिति में शरीर में मेलेनिन नामक पिगमेंट की मात्रा अधिक होने से त्वचा और बाल सामान्य से ज्यादा काले दिखाई देते हैं। ऐसे जीवों को मेलानिस्टिक हिरण कहा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, ये हिरण सामान्य बार्किंग डियर यानी भौंकने वाले हिरण या माया हिरण हो सकते हैं। हालांकि, उनकी सटीक पहचान की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच महत्वपूर्ण है।
2010 में सिंचल जंगल में दिखा था ऐसा दुर्लभ जीव
दार्जिलिंग के सिंचल जंगल में वर्ष 2010 में भी मेलानिस्टिक हिरण दिखाई देने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद कार्शियांग के डाउहिल क्षेत्र में इस साल जनवरी और अब दोबारा ऐसे हिरण की मौजूदगी ने वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। कार्शियांग वन विभाग के डीएफओ देवेश पांडे ने इसे खुशी की खबर बताया। उनके अनुसार, पहाड़ी जंगलों में पहले दुर्लभ काले तेंदुए देखे जाने की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन काले हिरण का दिखना बेहद खास है।
जंगल का अनुकूल वातावरण या संरक्षण के लिए नई चुनौती?
लगातार दो बार एक ही क्षेत्र में ऐसे हिरण दिखाई देने से जंगल के प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों की मौजूदगी पर चर्चा शुरू हो गई है। डीएफओ के अनुसार, यह स्थिति संकेत देती है कि डाउहिल का जंगल इन जीवों के रहने और संभावित प्रजनन के लिए अनुकूल हो सकता है। हालांकि, केवल दो बार दिखाई देने के आधार पर प्रजनन की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए वैज्ञानिक निगरानी और आगे के प्रमाण जरूरी होंगे।
दुर्लभ हिरण की सुरक्षा के लिए वन विभाग सतर्क
इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें सार्वजनिक होने के बाद अधिकारियों को आशंका है कि अवैध शिकार करने वाले गिरोह भी इसकी तलाश कर सकते हैं। इसी वजह से डाउहिल और आसपास के जंगलों में निगरानी बढ़ाने के लिए विशेष गश्ती दल गठित किया गया है। अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती के साथ संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। वन विभाग के सामने अब इस दुर्लभ जीव की पहचान, सुरक्षा और प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखने की चुनौती है। पर्यटकों से भी अपील है कि वे जंगल में वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और उनकी तस्वीरें लेने के लिए उन्हें परेशान न करें।
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