Balrampur News : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को आसाराम बापू की किताबें बांटने का मामला विवादों में आ गया है। अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने प्राचार्य को पद से हटा दिया है। अब तीन दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। आखिर बच्चों को ये किताबें किसके निर्देश पर बांटी गईं?

रघुनाथनगर के सरकारी स्कूल में किताबें बांटने पर विवाद
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रघुनाथनगर में किताबें बांटने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि विद्यालय में मिडिल स्कूल के बच्चों को आसाराम बापू से संबंधित ‘संस्कार सरिता’ नामक किताब वितरित की गई। मामला सामने आने के बाद अभिभावकों ने नाराजगी जताई और शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की। विवाद बढ़ने पर जिला शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक कदम उठाए हैं।

बच्चों के बस्ते में मिली ‘संस्कार सरिता’ किताब
जानकारी के अनुसार, घटना का खुलासा करीब तीन दिन पहले हुआ, जब स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चे अपने बस्ते में ‘संस्कार सरिता’ नामक किताब लेकर घर पहुंचे। परिजनों ने जब किताब देखी और उस पर आसाराम की तस्वीर पाई, तो उन्होंने बच्चों से इसके बारे में जानकारी ली। बच्चों ने कथित तौर पर बताया कि किताब स्कूल में बांटी गई थी। इसके साथ ही उन्हें इसे पढ़कर परीक्षा देने के निर्देश दिए गए थे। इस जानकारी के बाद अभिभावकों की नाराजगी बढ़ गई।
अभिभावकों ने जताया विरोध, उठाए गंभीर सवाल
अभिभावकों का आरोप है कि गंभीर आपराधिक मामलों में दोषसिद्ध व्यक्ति से संबंधित किताबें सरकारी स्कूल के बच्चों को बांटना उचित नहीं है। उनका कहना है कि विद्यालय में किसी व्यक्ति या संगठन की विचारधारा को विद्यार्थियों पर थोपने जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी किताबें बच्चों तक कैसे पहुंचीं और इन्हें बांटने से पहले सक्षम अधिकारियों से अनुमति ली गई थी या नहीं। हालांकि, इन आरोपों और किताब वितरण से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
संगठन से जुड़ाव का आरोप, जांच में होगी पड़ताल
मामले में अभिभावकों ने आरोप लगाया कि आसाराम से जुड़े एक संगठन ने स्कूल के प्राचार्य को किताबें उपलब्ध कराई थीं। आरोप यह भी है कि प्राचार्य ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना इन पुस्तकों का वितरण कर दिया। फिलहाल संगठन की भूमिका, किताबें उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति और वितरण के निर्देशों से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। जिला शिक्षा विभाग की जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि किताबें किस माध्यम से स्कूल पहुंचीं और वितरण का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

विवाद बढ़ने पर किताबें वापस जमा कराई गईं
मामले के सामने आने और विरोध बढ़ने के बाद स्कूल में बांटी गई अधिकांश किताबें वापस जमा करा लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इससे अभिभावकों की नाराजगी कम नहीं हुई। परिजनों की मांग है कि सरकारी शैक्षणिक संस्थान में किताबें बांटने की प्रक्रिया की जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। विवाद के कारण स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
प्राचार्य पद से हटाए गए, तीन दिन में जांच रिपोर्ट के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर नरेंद्र निरापुरे ने संबंधित विद्यालय के प्राचार्य को पद से हटाने की कार्रवाई की है। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, घटना को गंभीरता से लिया गया है। जांच में किताबों के वितरण, अनुमति प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने जैसे पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
अब शिक्षा विभाग की जांच से यह पता चल सकेगा कि किताबें किसने उपलब्ध कराईं, उन्हें बांटने का निर्णय किसने लिया और क्या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। फिलहाल प्राचार्य को पद से हटाने और जांच रिपोर्ट तलब करने की कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और विभागीय निर्णय पर निर्भर करेगी।

