Jantar Mantar Protest Case : दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और व्यापारियों को हुए नुकसान से जुड़े मामलों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार और आम नागरिकों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन कोई भी संगठन या व्यक्ति किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकता। मामले में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत कई राजनीतिक नेताओं का नाम भी सामने आया। अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
प्रदर्शन से दिल्ली के व्यापारियों को कितना नुकसान?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रदर्शन के कारण दिल्ली के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि धरना-प्रदर्शन के चलते बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने से हजारों करोड़ रुपये तक नुकसान होने की आशंका जताई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इस नुकसान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रदर्शन और व्यापार दोनों जरूरी
व्यापारियों की दलीलों पर अदालत ने कहा कि जिस तरह लोगों को विरोध करने का अधिकार है, उसी तरह व्यापार और रोजगार करने का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि प्रदर्शन की भी अपनी एक अर्थव्यवस्था होती है। वहीं याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि बाजारों के आसपास प्रदर्शन स्थल होने का मतलब यह नहीं कि वहां विरोध पर रोक लगा दी जाए।

CJI की दो टूक- किसी प्रदर्शन स्थल पर स्थायी कब्जा नहीं
चीफ जस्टिस ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर हमेशा के लिए नहीं बैठ सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसान, वकील और अन्य संगठन विरोध करना चाहें तो उन्हें जगह कैसे मिलेगी? अदालत के मुताबिक, प्रदर्शन की अनुमति निश्चित समय के लिए होनी चाहिए। किसी एक संगठन को ऐसा अधिकार नहीं दिया जा सकता कि दूसरे लोगों को वहां विरोध करने का अवसर ही न मिले।
संसद तक मार्च और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को एक दिन के लिए अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय के बाद भी जगह खाली नहीं की और संसद की ओर मार्च किया। उन्होंने कहा कि संसद देश की संप्रभुता का प्रतीक है और वहां तक मार्च करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

फेस रिकग्निशन तकनीक पर अदालत की अहम टिप्पणी
प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल पर भी बहस हुई। प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों की निगरानी किस कानूनी आधार पर की जा रही है। इस पर तुषार मेहता ने सार्वजनिक स्थानों पर निजता के अधिकार को लेकर दलील दी। जस्टिस बागची ने कहा कि चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक का इस्तेमाल तर्कसंगत और सावधानीपूर्वक होना चाहिए।
महिला पत्रकारों और पुलिसकर्मियों से बदसलूकी का मुद्दा
सुनवाई के दौरान महिला पत्रकारों और महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्रता का मामला भी उठा। गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की थी। राहुल गांधी और खरगे की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने इस आरोप पर आपत्ति जताई। अदालत ने पत्रकारों से जुड़े मामले को दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया, जबकि महिला पत्रकारों के उत्पीड़न के मामले पर अलग सुनवाई होगी।
राहुल गांधी, खरगे और अखिलेश यादव को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
चार वकीलों की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि विपक्षी नेताओं का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश थी। याचिका में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और कांग्रेस समेत अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और निजी प्रतिवादियों को 18 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नौ श्रेणियों में बांटे जाएंगे प्रदर्शन से जुड़े मामले
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रदर्शन से संबंधित मामलों और अन्य मुद्दों को नौ अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर सुना जाएगा। इससे प्रत्येक विवाद पर अलग-अलग विचार किया जा सकेगा। व्यापारियों के अधिकारों से जुड़ी याचिका पर भी केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता, सार्वजनिक व्यवस्था और आम लोगों की रोजी-रोटी के अधिकारों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

