Israel Government Formation : इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने पिछले सप्ताह हुए संसदीय चुनाव के प्रमाणित नतीजों को स्वीकार करते हुए सरकार बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। अब राष्ट्रपति देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सरकार गठन की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में उस नेता को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना होगी।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट से नेतन्याहू को लगा बड़ा झटका
राष्ट्रपति की घोषणा से पहले बुधवार को इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी चुनाव परिणामों को लेकर अपनी जांच रिपोर्ट जारी की। आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले सप्ताह हुए मतदान में उसे किसी भी तरह की धांधली, अनियमितता या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले ठोस सबूत नहीं मिले हैं। आयोग के इस बयान को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके समर्थकों के आरोपों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

9,069 मतदान केंद्रों की हुई जांच, शिकायतों पर आयोग ने दिया जवाब
इजरायल के कार्यवाहक चुनाव निदेशक डीन लिवने ने बताया कि मतदान से संबंधित सभी शिकायतों की अलग-अलग जांच की गई। इसके लिए चुनाव प्रक्रिया और मतदान केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया गया। आयोग ने कुल 9,069 मतदान केंद्रों की जांच की, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया, जिसके आधार पर चुनाव परिणामों को गलत या अमान्य घोषित किया जा सके।

आयोग के अनुसार, घोषित चुनाव परिणाम मतदाताओं की वास्तविक पसंद को दर्शाते हैं। इसलिए फिलहाल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का कोई ठोस आधार नहीं मिला है।
नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
दरअसल, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके समर्थकों ने चुनाव के दौरान अरब नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों पर विदेशी मदद से मतदान में धांधली करने का आरोप लगाया था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया। अब चुनाव आयोग की रिपोर्ट आने के बाद नेतन्याहू के आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

विदेशी हस्तक्षेप की जांच अभी पूरी नहीं, शिन बेट कर रही पड़ताल
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि विदेशी ताकतों की ओर से चुनाव को प्रभावित करने की आशंका की जांच अभी जारी है। इजरायल की आंतरिक खुफिया एजेंसी शिन बेट इस मामले की अलग से पड़ताल कर रही है। यानी मतदान में धांधली के सबूत नहीं मिलने के बावजूद विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े सवालों पर जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है।
नेतन्याहू और गादी आइजेनकोट के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती
इजरायल के चुनाव परिणामों में किसी भी प्रमुख गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन के साथ-साथ उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट का गठबंधन भी बहुमत से दूर रह गया है।इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। ऐसे में दोनों नेताओं के सामने छोटी राजनीतिक पार्टियों को अपने साथ जोड़ने की चुनौती खड़ी हो गई है।
संभावित राजनीतिक समीकरणों में नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच समझौता या आइजेनकोट की ओर से अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का समर्थन हासिल करना शामिल है। हालांकि, अभी किसी भी विकल्प पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
दो दिन तक दलों से चर्चा करेंगे राष्ट्रपति, फिर होगा बड़ा फैसला
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग अगले दो दिनों तक संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे। इन मुलाकातों के बाद वह उस नेता को सरकार बनाने का पहला अवसर देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे मजबूत संभावना होगी।
यदि कोई भी नेता निर्धारित समय में सरकार बनाने में सफल नहीं होता है, तो इजरायल को एक बार फिर चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अगले साल की शुरुआत में नए संसदीय चुनाव कराए जाने की संभावना है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इजरायल में सत्ता की कमान एक बार फिर नेतन्याहू के हाथों में जाएगी या गादी आइजेनकोट नया राजनीतिक समीकरण बनाने में कामयाब होंगे।

