मनेन्द्रगढ़@thetarget365: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया गया है, लेकिन ग्राम पंचायत चौगाड़ा के कई बच्चे इस अधिकार से वंचित रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी और निजी स्वार्थों के चलते बच्चों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।
कृष्णचन संस्थान के नाम से स्कूल, आरटीई से बाहर क्यों?
स्थानीय अभिभावकों के अनुसार, चौगाड़ा में संचालित स्कूल को “कृष्णचन संस्थान” के नाम से दर्ज कर दिया गया है, जिससे वह आरटीई के तहत आने वाले स्कूलों की सूची से बाहर हो गया है। परिणामस्वरूप, गरीब तबके के बच्चों को मुफ्त शिक्षा से वंचित कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय सुनियोजित तरीके से लिया गया ताकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम यहां लागू न हो।
अधिकारियों की अनदेखी, बच्चों का भविष्य अंधकार में
बच्चों के अभिभावकों ने कई बार जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल संचालकों और प्रशासन की मिलीभगत से यह साजिश रची गई है, जिससे गरीब परिवारों को निजी स्कूलों की ऊंची फीस भरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग: बच्चों को मिले आरटीई का लाभ
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
✅ 1. स्कूल की आरटीई पात्रता की पुनः जांच हो।
✅ 2. बच्चों को आरटीई के तहत तुरंत प्रवेश दिया जाए।
✅ 3. जिले के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
✅ 4. अगर लापरवाही साबित होती है, तो दोषी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई हो।
बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो चौगाड़ा के ग्रामीण बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?