Solar Prominence 2025: गुरुवार, 31 जुलाई को सूर्य की सतह पर एक अद्वितीय और प्रभावशाली खगोलीय घटना घटी। रूसी विज्ञान अकादमी के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान और साइबेरियाई शाखा के सौर-स्थलीय भौतिकी संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से से केवल एक घंटे के अंतर पर दो विशाल सौर प्रोमिनेंस अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए गए।

प्रत्येक प्रोमिनेंस का आकार करीब 10 लाख किलोमीटर
वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों सौर प्रोमिनेंस जब पूरी तरह से विकसित हो गए, तब उनका आकार लगभग 10 लाख किलोमीटर तक फैल चुका था। इनका आकार, समय और स्थान लगभग एक जैसा था, जो इस खगोलीय घटना को और भी रोचक बनाता है।

क्या होता है सौर प्रोमिनेंस?
सौर प्रोमिनेंस, सूर्य की सतह से निकलने वाला एक अत्यंत विशाल गैसीय पिंड होता है। यह गैस चुंबकीय बलों के कारण सूर्य के वायुमंडल में तैरती रहती है। कभी-कभी यह गैस अंतरिक्ष की ओर तेजी से प्रक्षेपित हो जाती है। इसकी लंबाई हजारों से लेकर लाखों किलोमीटर तक हो सकती है। यह सौर गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों प्रोमिनेंस सूर्य के उस हिस्से से निकले हैं जो पृथ्वी की ओर नहीं है। इसलिए फिलहाल पृथ्वी पर इनके प्रभाव की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, अगर इस प्रकार की घटना पृथ्वी की दिशा में होती, तो इसका असर हमारे संचार तंत्र, उपग्रहों, विद्युत ग्रिडों और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता था।
सौर गतिविधियों पर वैज्ञानिकों की लगातार निगरानी
इस प्रकार की घटनाएँ सौर गतिशीलता को समझने और पृथ्वी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होती हैं। वैज्ञानिक लगातार सूर्य की सतह पर हो रही हलचलों पर निगाह रख रहे हैं ताकि समय रहते किसी संभावित सौर तूफान या अंतरिक्षीय खतरे का पूर्वानुमान लगाया जा सके।
फिलहाल चिंता की बात नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी
हालाँकि फिलहाल यह घटना पृथ्वी से दूर घटी है और इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं होगा, फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि सूर्य की ऐसी गतिविधियाँ भविष्य में पृथ्वी की ओर भी हो सकती हैं। इसलिए इस प्रकार की घटनाओं की निगरानी और विश्लेषण वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक हैं।











