Congress attacks Modi : कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चीनी घुसपैठ के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सीमाई विवाद नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता के मूल पर हमला है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार संसद के भीतर और बाहर पूछे गए गंभीर सवालों से भाग रही है और केवल प्रचार में लगी है।

“सरकार संसद में नहीं दे रही जवाब, अब सड़कों से उठेगी आवाज”
उन्होंने कहा कि जब लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच – संसद – खामोश कर दिया जाता है, तो आवाजें सड़कों से उठनी चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा कि अगर सरकार सीमा की सुरक्षा करने में असफल हो जाती है, तो हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य बनता है कि वह सरकार से जवाब मांगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में सवाल उठाने वालों को राष्ट्रविरोधी घोषित कर दिया जाता है, जबकि चुप रहने वालों को देशभक्त माना जाता है।

‘सच्चे भारतीय’ का तमगा डरपोकों के लिए – कांग्रेस का तंज
वेणुगोपाल ने अपने ट्वीट में तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘सच्चे भारतीय’ कहलाने का तमगा आज उन लोगों के लिए है जो रीढ़विहीन, डरपोक और आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। कांग्रेस इस बात से नाराज है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सेना पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी को फटकार लगाई। पार्टी का कहना है कि सरकार वास्तविक सवालों से मुंह मोड़ रही है और जनता को सच्चाई से वंचित रखा जा रहा है।
जयराम रमेश ने कहा – सरकार अपना रही है ‘DDLJ नीति’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी सरकार चीन के साथ सीमा विवाद पर ‘DDLJ नीति’ अपना रही है – “दिल्ली दिखाओ, लद्दाख छिपाओ।” उन्होंने गलवान संघर्ष और उसके बाद की गतिविधियों पर सरकार से कई जवाब मांगे। रमेश का बयान सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद आया, जिसने राहुल गांधी की टिप्पणी पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाया विवाद
सुप्रीम कोर्ट के जज दीपांकर दत्ता ने सेना पर की गई टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी को फटकार लगाई और सवाल किया, “एक सच्चा भारतीय ऐसा कैसे कह सकता है?” उन्होंने यह भी पूछा कि राहुल को कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन कब्जा ली है और इस दावे के पीछे कौन सा विश्वसनीय दस्तावेज है?
कांग्रेस बोली – गलवान के बाद से देश के मन में हैं कई सवाल
कांग्रेस का कहना है कि गलवान झड़प के बाद से देश के नागरिकों के मन में अनेक सवाल हैं, लेकिन मोदी सरकार पारदर्शिता के बजाय तथ्यों को छुपाने में लगी हुई है। पार्टी ने कहा कि जब सरकार जवाब नहीं देती, तो लोकतंत्र में विपक्ष का कर्तव्य बनता है कि वह सवाल पूछे – चाहे उसे राष्ट्रविरोधी कहकर चुप कराने की कोशिश क्यों न हो।
कांग्रेस के बयानों और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चीन के साथ सीमा विवाद और सरकार की पारदर्शिता पर बहस फिर तेज हो गई है। विपक्ष सवाल कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष राष्ट्रभक्ति की कसौटी पर जवाब मांगने वालों की नीयत पर सवाल उठा रहा है।










