Nuclear War Threat: दुनिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ से परमाणु युद्ध का खतरा एकदम सामने दिखाई देने लगा है। अमेरिका और रूस—दोनों परमाणु महाशक्तियों के बीच जारी तनाव ने अब INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) संधि को भी निगल लिया है। रूस ने आधिकारिक रूप से ऐलान किया है कि वह अब इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं करेगा।

रूस के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में रूसी जलक्षेत्र के पास दो परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच टकराव की जड़ में अब भी यूक्रेन युद्ध है, जो पूरी दुनिया की शांति व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।

रूस की कड़ी चेतावनी: अब कोई पाबंदी नहीं मानी जाएगी
मॉस्को ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि 1987 की INF संधि अब प्रासंगिक नहीं रही है। सोवियत संघ के समय बनी यह संधि अब बाध्यकारी नहीं है और अमेरिका लगातार इसे कमजोर कर रहा है। ऐसे में रूस अब इस संधि की किसी शर्त का पालन नहीं करेगा।
रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, “INF संधि का आधार पहले ही समाप्त हो चुका है। अमेरिका द्वारा बार-बार इसके उल्लंघन और यूरोप में मिसाइल प्रणालियों की तैनाती के बाद रूस को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है।”
INF संधि: जिसने खत्म किया था शीत युद्ध का डर
गौरतलब है कि 8 दिसंबर 1987 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव के बीच INF संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत 500 से 5,500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली परमाणु मिसाइलों को नष्ट करना तय किया गया था।
यह संधि शीत युद्ध के चरम दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच परमाणु हथियारों की होड़ को थामने वाला पहला बड़ा कदम थी। इसके तहत करीब 2,700 मिसाइलें नष्ट की गईं थीं।
ट्रंप की रणनीति और जवाब में रूस का रुख
डोनाल्ड ट्रंप, जो रूस पर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ा रहे हैं, उन्होंने हाल ही में भारत, चीन और अन्य रूसी साझेदारों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसके अलावा, अमेरिका ने रूस की समुद्री सीमा के पास दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर दीं, जिसे रूस ने सीधी उकसावे की कार्रवाई करार दिया।
इससे पहले, रूसी नेता दिमित्री मेदवेदेव ने भी तीखी चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका और NATO ने सीमा लांघी तो रूस किसी भी स्तर पर जवाब देने के लिए तैयार है—यहां तक कि परमाणु स्तर पर भी।
परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू?
विशेषज्ञों का मानना है कि INF संधि से रूस का पीछे हटना न सिर्फ अमेरिका-रूस संबंधों को नई गहराई तक खराब करेगा, बल्कि नई वैश्विक परमाणु दौड़ को भी जन्म दे सकता है। अगर अमेरिका और रूस दोबारा मध्यम दूरी की परमाणु मिसाइलें तैनात करते हैं, तो यूरोप और एशिया सबसे पहले निशाने पर आएंगे। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, दुनिया में इस समय लगभग 12,500 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से करीब 90% अमेरिका और रूस के पास हैं।
भारत पर भी प्रभाव संभव
डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक रणनीति के तहत भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की धमकी भी दी जा चुकी है, क्योंकि भारत रूस से तेल और हथियार खरीद रहा है। INF संधि की समाप्ति से भारत जैसे देशों पर दोहरी चुनौती आ सकती है—सुरक्षा संतुलन बनाए रखना और राजनयिक दबाव से निपटना।
क्या आगे होगा?
सवाल यह है कि अब आगे क्या? क्या अमेरिका भी अब INF संधि को पूरी तरह अलविदा कह देगा? क्या यूरोप में फिर से अमेरिकी परमाणु मिसाइलें तैनात होंगी? और क्या रूस एशिया के कुछ हिस्सों में भी मध्यम दूरी की मिसाइलें भेजेगा? अभी ये सारे सवाल अनुत्तरित हैं, लेकिन एक बात साफ है—दुनिया एक बार फिर ‘परमाणु अनिश्चितता’ के युग में प्रवेश कर रही है। जब एक गलती या एक बयान, पूरी सभ्यता को खतरे में डाल सकता है।
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