Akhilesh on Modi trip : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों चीन और जापान के दौरे पर हैं, जो 29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति और व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत की विदेश नीति, विशेषकर एशिया में, और अधिक संवेदनशील हो गई है।

अखिलेश यादव का तीखा सवाल
पीएम मोदी के इस बहुप्रतीक्षित दौरे पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा: “जापान से संबंध बनाएं और वहाँ जा रहे हैं तो क्योटो भी होकर आएं, लेकिन जो चीन हमारे देश की भूमि और बाज़ार हड़प रहा है, उससे चौबीसों घंटे सतर्क रहें। विदेश नीति वैश्विक शांति और वैकासिक साझेदारी को बढ़ावा दे तो अच्छा है, टकराहट को नहीं। कोई भी वैदेशिक समझौता देश की सुरक्षा और समृद्धि से समझौता नहीं होना चाहिए।” अखिलेश का यह बयान चीन के साथ संबंधों को लेकर बढ़ती राजनीतिक सतर्कता को दर्शाता है, खासकर ऐसे समय में जब LAC पर तनाव की पूरी तरह से समाप्ति नहीं हुई है।

जापान में गर्मजोशी से स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने जापान दौरे की शुरुआत टोक्यो से की, जहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों योशिहिडे सुगा और फुमियो किशिदा से मुलाकात की। शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें जापानी “दारुमा” गुड़िया भेंट की, जो लक्ष्य प्राप्ति और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। टोक्यो में आयोजित भारत-जापान आर्थिक मंच में पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने शिरकत की। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा: “जापान टेक्नोलॉजी पावरहाउस है और भारत टैलेंट पावरहाउस। एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भारत ने अनेक बोल्ड कदम उठाए हैं।”यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत-जापान संबंधों का केंद्र अब सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी और नवाचार बन चुका है।
चीन दौरे के रणनीतिक मायने
पीएम मोदी का चीन दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि हाल ही में शी जिनपिंग ने भारत को रिश्ते सुधारने का प्रस्ताव दिया था। सीमा विवाद और अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच यह दौरा दोनों देशों के लिए सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान PM मोदी की शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से त्रिपक्षीय मुलाकात संभावित है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति को मजबूती देने वाला है। हालांकि विपक्ष, खासकर अखिलेश यादव जैसे नेता, यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह विदेश यात्रा राष्ट्रीय हितों से समझौता न करे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरे से क्या ठोस नतीजे सामने आते हैं।











