Supreme Court PCPNDT: राज्यों की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पीसीपीएनडीटी कानून पर जवाब नहीं देने पर जुर्माने की चेतावनी

Supreme Court PCPNDT : सुप्रीम कोर्ट ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दाखिल याचिका पर कुछ राज्यों की बेरुखी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि चार सप्ताह के भीतर लंबित हलफनामे दाखिल नहीं किए गए, तो संबंधित राज्यों पर जुर्माना लगाया जाएगा। पीसीपीएनडीटी कानून भ्रूण के लिंग परीक्षण पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था, जिसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और लिंगानुपात को संतुलित करना है। लेकिन कई राज्यों की निष्क्रियता इस उद्देश्य को कमजोर कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने पाया कि अधिकांश राज्यों ने कोर्ट के निर्देशानुसार हलफनामे दाखिल कर दिए हैं, लेकिन करीब पांच राज्य अब तक ऐसा करने में विफल रहे हैं। बेंच ने दो टूक कहा, “हम अभी जुर्माना नहीं लगा रहे हैं, लेकिन अगली बार लगाएंगे।” बेंच को वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने बताया कि कुछ मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया, लेकिन राज्य सरकारों ने उन मामलों में अपील तक दाखिल नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित अधिकारियों ने लापरवाही बरती और कानून की सही तरीके से पालना नहीं की। हलफनामों में क्या जानकारी मांगी गई? सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे मई 2015 से अब तक पीसीपीएनडीटी कानून के तहत लंबित मुकदमों, अपीलों और पुनरीक्षण याचिकाओं का ब्यौरा दें। इसके अलावा यह भी स्पष्ट करें कि बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ कितनी अपीलें की गईं। आगे क्या? कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2025 को तय की है और तब तक सभी लंबित हलफनामे दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। साथ ही, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख को अमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त किया गया है, जो अदालत को मामले की गहराई से जानकारी देंगे। याचिका का उद्देश्य यह याचिका अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का “अक्षरशः और भावना के अनुसार पालन नहीं हो रहा है।” याचिका में दोषियों के खिलाफ अपील दायर करने, दोषसिद्धि दर बढ़ाने और कानून के सख्त अनुपालन की मांग की गई है। Read More: Eijaz Khan FIR : गैंगस्टर सलमान लाला के समर्थन में रील पोस्ट करना पड़ा भारी, बॉलीवुड एक्टर एजाज खान पर FIR दर्ज

Supreme Court PCPNDT : सुप्रीम कोर्ट ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दाखिल याचिका पर कुछ राज्यों की बेरुखी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि चार सप्ताह के भीतर लंबित हलफनामे दाखिल नहीं किए गए, तो संबंधित राज्यों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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पीसीपीएनडीटी कानून भ्रूण के लिंग परीक्षण पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था, जिसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और लिंगानुपात को संतुलित करना है। लेकिन कई राज्यों की निष्क्रियता इस उद्देश्य को कमजोर कर रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने पाया कि अधिकांश राज्यों ने कोर्ट के निर्देशानुसार हलफनामे दाखिल कर दिए हैं, लेकिन करीब पांच राज्य अब तक ऐसा करने में विफल रहे हैं। बेंच ने दो टूक कहा, “हम अभी जुर्माना नहीं लगा रहे हैं, लेकिन अगली बार लगाएंगे।”

बेंच को वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने बताया कि कुछ मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया, लेकिन राज्य सरकारों ने उन मामलों में अपील तक दाखिल नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित अधिकारियों ने लापरवाही बरती और कानून की सही तरीके से पालना नहीं की।

हलफनामों में क्या जानकारी मांगी गई?

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे मई 2015 से अब तक पीसीपीएनडीटी कानून के तहत लंबित मुकदमों, अपीलों और पुनरीक्षण याचिकाओं का ब्यौरा दें। इसके अलावा यह भी स्पष्ट करें कि बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ कितनी अपीलें की गईं।

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आगे क्या?

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2025 को तय की है और तब तक सभी लंबित हलफनामे दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। साथ ही, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख को अमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त किया गया है, जो अदालत को मामले की गहराई से जानकारी देंगे।

याचिका का उद्देश्य

यह याचिका अधिवक्ता शोभा गुप्ता द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का “अक्षरशः और भावना के अनुसार पालन नहीं हो रहा है।” याचिका में दोषियों के खिलाफ अपील दायर करने, दोषसिद्धि दर बढ़ाने और कानून के सख्त अनुपालन की मांग की गई है।

Read More: Eijaz Khan FIR : गैंगस्टर सलमान लाला के समर्थन में रील पोस्ट करना पड़ा भारी, बॉलीवुड एक्टर एजाज खान पर FIR दर्ज

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