Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन अब एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट में बदल चुका है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं द्वारा शुरू किया गया यह विरोध अब व्यापक हिंसा में तब्दील हो चुका है। राजधानी काठमांडू सहित कई हिस्सों में अराजकता फैल गई है।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दिया इस्तीफा
विरोध प्रदर्शन की तीव्रता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, अन्य वरिष्ठ नेता और मंत्री सुरक्षित स्थानों पर भेज दिए गए हैं। बावजूद इसके, प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। सरकारी इमारतों, नेताओं के घरों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

सेना ने संभाला मोर्चा, रात 10 बजे से शुरू हुआ नियंत्रण अभियान
स्थिति को काबू में लाने के लिए नेपाल सेना ने रात 10 बजे से राजधानी काठमांडू में नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। सेना ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर हिंसा जारी रही तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था को एक्टिव किया जाएगा।
जनसंपर्क एवं सूचना निदेशालय ने भी कहा है कि कुछ असामाजिक तत्व इस परिस्थिति का अनुचित लाभ उठा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है।
576 कैदी जेल से फरार
प्रदर्शनकारियों ने महोत्तरी जिले की जलेश्वर जेल पर हमला कर दिया। इस हमले के दौरान लगभग 576 कैदी जेल से फरार हो गए। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कैदियों को जेल से भागते हुए देखा जा सकता है। यह घटना नेपाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सुबह मिली राहत, सेना की अपील का असर
10 सितंबर की सुबह काठमांडू में कुछ हद तक शांति देखी गई। सेना ने एक बार फिर नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने की अपील की है। सेना ने कहा कि “हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए हैं, लेकिन हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है।”
नेपाल इस समय राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक उथल-पुथल के कठिन दौर से गुजर रहा है। Gen-Z आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि देश की युवा पीढ़ी पारदर्शिता और डिजिटल अधिकारों के लिए जागरूक है और अब वे किसी भी तरह की दमनकारी नीति को सहन करने के मूड में नहीं हैं। ऐसे में नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को संवाद और सहमति की ओर कदम बढ़ाना होगा।










