Income Tax Growth : सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 9.18 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 सितंबर तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 10.82 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 9.91 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन है।

नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में वृद्धि के प्रमुख कारण
इस वृद्धि का मुख्य कारण कंपनियों से एडवांस टैक्स कलेक्शन में 6.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी और रिफंड की धीमी गति रही है। इस दौरान रिफंड राशि में 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अब 1.61 लाख करोड़ रुपये रह गई है।

कॉर्पोरेट और नॉन कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन का हाल
1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच नेट कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन बढ़कर 4.72 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.50 लाख करोड़ रुपये था। नॉन कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन भी मजबूत रहा और यह 5.84 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 5.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। नॉन कॉर्पोरेट टैक्स में व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) का टैक्स शामिल होता है।
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) और सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) संग्रह में भी मामूली वृद्धि देखी गई है। इस वित्त वर्ष के दौरान STT संग्रह 26,306 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 26,154 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक है।सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी 3.39 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है और यह 12.43 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
सरकार का 2025-26 वित्त वर्ष लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य 25.20 लाख करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.7 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, इस वित्त वर्ष में सरकार ने प्रतिभूति लेनदेन कर से 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

निर्मला सीतारमण का GST सुधारों पर बयान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में किए गए GST सुधारों को लेकर कहा कि इससे अर्थव्यवस्था में 2 लाख करोड़ रुपये का इजाफा होगा और सभी सेक्टरों में मांग में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि GST काउंसिल द्वारा दरों में कटौती राज्य सरकारों के सहयोग की भावना का परिणाम है। उन्होंने कहा, “GST में कोई देने-लेने वाला मॉडल नहीं है, अगर राजस्व कम होता है तो केंद्र भी उतना ही वहन करता है।”
सरकार की टैक्स वसूली में हो रही यह बढ़ोतरी आर्थिक सुधारों की सफलता का संकेत है। कंपनियों से बढ़ती टैक्स वसूली और धीमे रिफंड ने राजस्व संग्रह को मजबूती दी है। आगामी वित्त वर्ष के लिए निर्धारित बड़े लक्ष्य इस बात का संकेत हैं कि सरकार आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन दोनों को प्राथमिकता दे रही है।











