Russia US Tariff Statement: भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर रूस ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि दोनों प्राचीन सभ्यताएं अमेरिकी अल्टीमेटम के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने यह बात रूस के प्रमुख चैनल 1 टीवी के कार्यक्रम ‘द ग्रेट गेम’ में कही। लावरोव ने अमेरिका की टैरिफ नीतियों और ऊर्जा खरीद पर लगाई गई पाबंदियों की आलोचना करते हुए इसे विफल और अनुचित करार दिया।

लावरोव का बयान और अमेरिकी टैरिफ पर प्रतिक्रिया
सर्गेई लावरोव ने कहा, “चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके साथ यह भाषा काम नहीं करती कि ‘तुम ऐसा करो नहीं तो मैं टैरिफ लगा दूंगा’।” उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के दृष्टिकोण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इससे केवल राजनीतिक विरोध पैदा होता है और यह नीति लंबी अवधि में सफल नहीं हो सकती।

लावरोव ने यह भी बताया कि अमेरिका की रूसी ऊर्जा खरीद पर रोक लगाने की मांग भारत और चीन जैसे देशों को नए ऊर्जा स्रोत खोजने और महंगी कीमतें चुकाने पर मजबूर कर रही है। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से इन देशों को प्रभावित करता है बल्कि राजनीतिक और नैतिक रूप से भी विरोधाभासी है।
भारत पर अमेरिका ने लगाए 50% टैरिफ
पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था। इसके बाद, भारत द्वारा रूस से निरंतर तेल आयात का हवाला देते हुए यह टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। यह अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त 2025 से प्रभावी है।
भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापारिक तनाव वैश्विक बाजारों में भी चिंता का विषय बना हुआ है। भारत ने रूस से किफायती ऊर्जा आयात को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता बताया है, खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध की पृष्ठभूमि में।

वैश्विक व्यापार और राजनीतिक असर
रूसी विदेश मंत्री का मानना है कि अमेरिका की इस कड़े रुख से केवल भारत, चीन और अन्य विकासशील देशों के आर्थिक हालात बिगड़ेंगे और उन्हें महंगे विकल्प तलाशने होंगे। इससे न केवल उनके व्यापार को नुकसान होगा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर सकता है।
उन्होंने अमेरिकी नीति को “एकतरफा” और “प्राचीन सोच” बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नुकसान होगा और विश्व स्तर पर स्थिरता और भरोसे पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
रूस के इस बयान से यह साफ हो गया है कि भारत और चीन अमेरिका के व्यापार दबावों और टैरिफ अल्टीमेटम के आगे नहीं झुकेंगे। दोनों देशों ने अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने शुरू कर दिए हैं। इस तनाव के बीच भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी असर पड़ रहा है, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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