Rahul Gandhi ECI: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भाजपा पर लगाए गए गंभीर आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानून और नियमों के तहत होती है और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात का सवाल ही नहीं उठता।

राहुल गांधी के आरोपों की पृष्ठभूमि
राहुल गांधी ने हाल ही में कई चुनावी सभाओं और प्रेस कांफ्रेंस में यह दावा किया था कि भाजपा के दबाव में चुनाव आयोग विपक्षी वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं।

चुनाव आयोग का तर्क: डेटा और नियमों के साथ जवाब
आयोग ने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए कुछ विशेष उदाहरणों का उल्लेख करते हुए, उनके आधार पर ही तथ्यों के साथ जवाब दिया। कर्नाटक के आलंद क्षेत्र का जिक्र करते हुए आयोग ने बताया:
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6,018 आवेदन मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्राप्त हुए थे।
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जांच में सिर्फ 24 आवेदन वैध पाए गए, जबकि 5,994 आवेदन फर्जी निकले।
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इस फर्जीवाड़े को लेकर पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई और जांच जारी है।
इसी तरह महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के राजुरा विधानसभा क्षेत्र में 7,792 नए मतदाता पंजीकरण के आवेदन आए, जिनमें से 6,861 आवेदन अमान्य पाए गए और उन्हें खारिज कर दिया गया।
मतदाता नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि:
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कोई भी नागरिक फॉर्म-7 के जरिए ऑनलाइन या ऑफलाइन नाम हटाने का आवेदन दे सकता है।
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लेकिन आवेदन देने मात्र से नाम नहीं हटाया जा सकता।
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नियमों के अनुसार नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति से जवाब लिया जाता है।
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इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी कर ही कोई निर्णय लिया जाता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे की बात
चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची एक संवेदनशील और लोकतांत्रिक आधार प्रक्रिया है। ऐसे में इस पर तथ्यहीन आरोप लगाने से जनता में भ्रम फैलता है और लोकतंत्र की संस्थाओं पर अविश्वास उत्पन्न होता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे सार्वजनिक बयान देते समय जिम्मेदारी का पालन करें और बेबुनियाद आरोपों से बचें।
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तथ्यों और प्रक्रियाओं के आधार पर सीधा जवाब देते हुए यह संदेश दिया है कि देश में मतदाता सूची की व्यवस्था मजबूत, पारदर्शी और निष्पक्ष है। आयोग की ओर से दिए गए आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि जहां भी गड़बड़ी के संकेत मिले, वहां सख्त कार्रवाई की गई और जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया है।










