Leh Protest 2025: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठवीं अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को लेह में बड़ा प्रदर्शन हिंसा में बदल गया। छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प के दौरान चार लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय और एक CRPF वाहन को आग के हवाले कर दिया।

हिंसा के पीछे क्या था कारण?
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की युवा इकाई द्वारा बुलाए गए लद्दाख बंद के दौरान अनशन पर बैठे दो प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी के बाद कुछ युवाओं ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, और स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया।

सरकार का सख्त रुख, भारी सुरक्षा बलों की तैनाती
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा को “सुनियोजित साजिश” करार देते हुए स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सीएपीएफ की 12 कंपनियों को तैनात करने का आदेश दिया है। फिलहाल CRPF की चार कंपनियां मौके पर पहुंच चुकी हैं और ITBP की चार कंपनियां भी भेजी जा रही हैं। प्रशासन ने लेह में BNS की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है।
उपराज्यपाल ने जताई साजिश की आशंका
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने प्रदर्शन को बाहरी साजिश बताया और कहा कि “कुछ तत्व जानबूझकर लोगों को भड़का रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इस हिंसा के पीछे लद्दाख से बाहर के लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया आरोप
बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कांग्रेस के वार्ड सदस्य फंटसोग स्तांजिन त्सेपाग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दावा किया कि उन्होंने ही बीजेपी दफ्तर पर हमला किया।
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल वापस ली
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो पिछले 35 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, ने हिंसा के बाद अनशन खत्म करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि “जेन जेड” में बढ़ती हताशा ने आंदोलन को हिंसक बना दिया। वहीं, सरकारी सूत्रों ने वांगचुक पर युवाओं को उकसाने और ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगे
प्रदर्शनकारी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, छठवीं अनुसूची का प्रावधान, और लेह व करगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीट की मांग कर रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने से पहले लद्दाख में 4 विधानसभा सीटें थीं, जिन्हें फिर से बहाल करने की भी मांग की जा रही है।लेह में हुई यह हिंसा लद्दाख की राजनीतिक मांगों और युवाओं के बीच बढ़ती असंतोष का संकेत है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। शांति बहाली के लिए सभी पक्षों को संयम और समझदारी दिखाने की ज़रूरत है।
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