Thalapathy Vijay Biography :तमिलनाडु के करूर में अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की रैली में हुई भगदड़ ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस हादसे में 36 लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों के मन में एक ही सवाल है – आख़िर थलपति विजय कौन हैं? आइए जानते हैं इस लोकप्रिय अभिनेता और अब नेता के बारे में।

कौन हैं थलपति विजय?
थलपति विजय का असली नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। वे दक्षिण भारतीय सिनेमा, खासकर तमिल फिल्मों के सुपरस्टार माने जाते हैं। विजय का जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर एक जाने-माने फिल्म निर्देशक हैं और मां शोभा चंद्रशेखर एक प्लेबैक सिंगर हैं।

विजय ने अपने करियर की शुरुआत साल 1992 में फिल्म “नालया थीरपू” से की थी, जिसे उनके पिता ने निर्देशित किया था। इसके बाद उन्होंने “पूवेल्लम केत्तुपार,” “गिली,” “थुपक्की,” “मर्सल,” और “मास्टर” जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। विजय की लोकप्रियता इतनी है कि उन्हें दक्षिण भारत में “थलपति” (सेनापति) कहा जाता है, जो एक सम्मानजनक उपाधि है।
राजनीतिक पारी की शुरुआत
2 फरवरी 2024 को विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी “तमिलगा वेत्री कषगम” (TVK) की स्थापना की। इस पार्टी का उद्देश्य सामाजिक न्याय, युवाओं को सशक्त बनाना और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना है। विजय ने ऐलान किया कि वह 2026 के विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी को मैदान में उतारेंगे।
टीवीके की अब तक की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती रही है, जो यह दिखाता है कि विजय की फिल्मों की तरह उनकी राजनीतिक छवि भी लोगों को आकर्षित कर रही है। हालांकि, इतनी भीड़ को संभालने में कई बार प्रशासन को चुनौती का सामना करना पड़ा है।
करूर रैली में हादसा
करूर में आयोजित रैली में अनुमान से कई गुना ज्यादा भीड़ उमड़ पड़ी। विजय के देर से पहुंचने और अव्यवस्थित व्यवस्था के चलते भगदड़ मच गई, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आयोजन के स्तर पर गंभीर लापरवाही का संकेत है।
यह पहली बार नहीं है जब विजय की रैली को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी उनकी रैली पर मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए भीड़ नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए थे।
थलपति विजय सिर्फ एक फिल्मी सितारा नहीं, बल्कि अब एक उभरते हुए राजनीतिक नेता भी हैं। लेकिन करूर की भयावह घटना ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति में सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सूझबूझ भी जरूरी होती है। उम्मीद है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी और आगे के आयोजनों में जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा।











