Bihar Elections 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने चुनाव के असली मुद्दों पर सवाल उठाए और बताया कि बिहार के चुनाव किस आधार पर लड़ा जाएगा। संजय सिंह ने कहा, “सवाल यह है कि बिहार का चुनाव किन मुद्दों पर होगा? क्या ये चुनाव वोट चोरी, बेरोजगारी, शिक्षा, कानून व्यवस्था, अस्पताल या फिर जाति-धर्म के आधार पर होगा?”

बिहार चुनाव में विकास बन सकता है निर्णायक मुद्दा
संजय सिंह ने कहा कि यदि लोगों को लगता है कि मौजूदा सरकार (NDA) ठीक है, तो वे उसे ही वोट देंगे। लेकिन यदि जनता को लगता है कि बदलाव की जरूरत है, तो इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिहार में विकास और आम जनता की भलाई के मुद्दे सबसे आगे होने चाहिए।

दिल्ली में शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव का उदाहरण
सांसद ने अपनी पार्टी के दिल्ली मॉडल की भी तारीफ की और बताया कि दिल्ली में शिक्षा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी ने क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा, “हमने दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा सुधार किया है जिसे पूरे देश में सराहा गया है।” उन्होंने बिहार में भी ऐसे ही विकास और सुधार की उम्मीद जताई।
बिहार में विकास और रोजगार पर ध्यान देने की जरूरत
संजय सिंह ने यह भी कहा कि बिहार जैसे राज्य में बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे आम जनता की ज़िन्दगी को सीधे प्रभावित करते हैं और इन पर चुनावी लड़ाई होनी चाहिए।
जाति-धर्म से ऊपर उठकर सोचने का आह्वान
उन्होंने बिहार की राजनीतिक पार्टियों से अपील की कि वे जाति और धर्म के आधार पर वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर विकास और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता दें। उन्होंने कहा, “जब जनता विकास देखेगी, तो जाति-धर्म के सवाल अपने आप पीछे हट जाएंगे।”
चुनावी समीकरण और AAP की भूमिका
AAP बिहार में पहली बार बड़ी सक्रियता से चुनावी मैदान में उतरी है। संजय सिंह ने कहा कि पार्टी बिहार के लोगों को एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि बिहार के मतदाता विकास और पारदर्शिता के आधार पर निर्णय लेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीति में अब जातिगत समीकरणों के साथ-साथ विकास, शिक्षा, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। AAP सांसद संजय सिंह के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी बिहार चुनाव को सिर्फ जाति-धर्म के मुद्दे तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास को प्राथमिकता देना चाहती है।











