TMC MPs Rebellion Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व की नींव हिलाकर रख दी है। विधायकों के बाद अब टीएमसी के सांसदों ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने पाला बदलते हुए केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) सरकार को अपना समर्थन देने का एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला किया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद संसद से लेकर कोलकाता के सियासी गलियारों तक हड़कंप मच गया है।

काकोली घोष दस्तीदार का बड़ा दावा
तृणमूल कांग्रेस की पूर्व वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि बागी गुट के सभी 20 लोकसभा सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन देने के फैसले से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अवगत करा दिया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस संबंध में बहुत जल्द एक औपचारिक समर्थन पत्र भी स्पीकर कार्यालय को सौंप दिया जाएगा। काकोली घोष ने जोर देकर कहा कि सांसदों का यह कदम जनता के जनादेश और देश के विकास के अनुकूल है।

दिल्ली में बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर हुई अहम बैठक
इस सियासी बगावत की पटकथा को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार की दोपहर दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बागी गुट के 11 लोकसभा सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर जाकर मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी विशेष रूप से इन बागी सांसदों से मिलने पहुंचे। इस रणनीतिक बैठक में सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे टीएमसी के कई बड़े और चर्चित चेहरे मौजूद रहे।
संसद और विधानसभा दोनों जगह टीएमसी बैकफुट पर
वर्तमान संसदीय आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा में टीएमसी के पास कुल 28 सांसद और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। लेकिन इस ताजा विद्रोह के बाद लोकसभा में ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह अल्पमत में आती दिख रही है। पार्टी में फूट का यह सिलसिला केवल सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ठीक पहले 3 जून को पश्चिम बंगाल के कुल 80 टीएमसी विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से अलग होकर अपना एक नया गुट बना लिया था। इस बागी विधायक गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुना था। अब विधायकों के बाद सांसदों की इस बड़ी टूट ने ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को आधा कर दिया है।
रविवार देर रात दिल्ली में हुई गुप्त बैठक
न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस आधिकारिक घोषणा से पहले रविवार की देर रात दिल्ली के एक गुप्त और अज्ञात स्थान पर टीएमसी के इन 20 बागी सांसदों की एक अनौपचारिक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में सभी सांसदों ने ममता बनर्जी की मौजूदा कार्यशैली और तानाशाही व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया था। सोमवार को इस गोपनीय बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गई, जिसमें कई सांसद एक मेज के चारों तरफ बैठे गंभीर चर्चा करते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान एक सांसद द्वारा मोबाइल से फोटो खींचे जाने पर अन्य नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद काफी बहस भी हुई। इस तस्वीर में दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद थे।
वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे का राज्यसभा से इस्तीफा
पार्टी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब टीएमसी के सबसे वरिष्ठ स्तंभों में से एक सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया है। सुखेंदु शेखर ने अपने त्यागपत्र में ममता बनर्जी के पिछले 15 साल के शासनकाल को ‘अराजक’ करार दिया और इसे पार्टी के पतन की मुख्य वजह बताया। उन्होंने इस्तीफे के बाद मीडिया से खुलकर कहा कि ममता बनर्जी मनमाने ढंग से और तानाशाही तरीके से पार्टी चला रही थीं, जिससे अधिकांश नेता घुटन महसूस कर रहे थे। उनका कार्यकाल साल 2029 तक था, लेकिन अब यह सीट खाली होने के बाद यहां उपचुनाव कराया जाएगा।
बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने किया सुखेंदु का समर्थन
सुखेंदु शेखर के इस कड़े कदम का समर्थन करते हुए टीएमसी के बागी विधायक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ सुखेंदु जी की निजी पीड़ा नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर का कड़वा सच है। उन्होंने कहा, “मैंने टीवी पर उनके बयान सुने हैं और मैं उनकी बातों से पूरी तरह सहमत हूं। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है, वहां गंभीर काम होना चाहिए।” दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने बागी नेता रीताब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के विधानसभा स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा।
काकोली घोष का दावा- “मैं ही रहूंगी चीफ व्हिप”
पार्टी से अलग होने के बावजूद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा में अपने पद को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद पर बनी रहेंगी, क्योंकि यह निर्णय उनके साथी सांसदों के बहुमत और आपसी विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। आपको बता दें कि काकोली घोष ने बीते 27 मई को ही टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को पत्र भेजकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन सांसद पद नहीं छोड़ा था। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने बहुत लंबे मानसिक संघर्ष और आत्मचिंतन के बाद ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का यह कठिन फैसला लिया है।
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