Crude Oil Price : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इन घातक सैन्य कार्रवाइयों के कारण न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की चिंताएं भी चरम पर पहुंच गई हैं। इन हमलों के तुरंत बाद वैश्विक स्तर पर कमोडिटी और इक्विटी मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां ऊर्जा संकट गहराने की आशंका से कच्चे तेल के दामों में जबरदस्त उछाल आया है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के शेयर बाजारों पर मंदी और बिकवाली का काला साया मंडराने लगा है, जिससे निवेशक सहमे हुए हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में एक फीसदी का उछाल और खाड़ी से सप्लाई रुकने की आशंका
अमेरिकी वायुसेना की बमबारी का सबसे पहला और सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अचानक करीब 1 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य गतिरोध इसी तरह जारी रहा, तो खाड़ी देशों (Gulf Region) से होने वाला तेल निर्यात पूरी तरह से ठप हो सकता है। चूंकि होर्मुज स्ट्रेट जैसे वैश्विक व्यापारिक मार्ग इस युद्ध की जद में हैं, इसलिए यदि तेल की आपूर्ति में थोड़ी सी भी कमी आती है, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें एक नया रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं, जो सभी देशों के लिए घातक होगा।

वैश्विक निवेशकों में बढ़ी भारी घबराहट और जोखिम से बचने की चौतरफा कोशिश
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी और युद्ध की आहट ने दुनिया भर के बड़े संस्थागत और खुदरा निवेशकों को बेहद सतर्क और चिंतित कर दिया है। तेल संकट के गहराने और इसके कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बेलगाम होने की आशंका के चलते निवेशकों ने बाजारों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर एशियाई बाजारों पर साफ देखा जा रहा है। संकट की इस घड़ी में कोई भी नया जोखिम लेने से बच रहा है, जिससे बाजारों में लिक्विडिटी यानी नकदी का संकट भी धीरे-धीरे खड़ा होने लगा है और चौतरफा अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट और लाल निशान के साथ खुलने के आसार
पश्चिम एशिया के इस बारूदी तनाव के कारण एशियाई महाद्वीप के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में भारी हाहाकार मचने की आशंका है। तेल संकट और आर्थिक सुस्ती के डर से जापान का निक्केई, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग, सिंगापुर और भारत का घरेलू शेयर बाजार (BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी) भारी गिरावट के साथ लाल निशान में खुलने की पूरी कगार पर हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक युद्ध की स्थिति शांत नहीं होती, तब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय और अन्य एशियाई बाजारों में बिकवाली जारी रख सकते हैं। इस बड़ी मंदी के चलते कंपनियों के मूल्यांकन में भारी कमी आने की आशंका बढ़ गई है।
कूटनीतिक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट
आमतौर पर यह देखा गया है कि जब भी दुनिया के किसी हिस्से में युद्ध या गंभीर भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति पैदा होती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने (Gold) की तरफ भागते हैं, जिससे सोने की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में बाजार का रुख पारंपरिक सिद्धांतों के विपरीत काफी अलग और चौंकाने वाला नजर आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। आज लगातार तीसरे दिन भी सोने के दाम गिरते हुए दिखाई दिए हैं। हालिया सैन्य झड़पों ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षविराम (Ceasefire) की स्थिरता और कूटनीतिक वार्ताओं को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व कूटनीतिक अनिश्चितता और नकदी बचाने की होड़ के बीच सोने की पारंपरिक मांग में अस्थायी कमी आई है, जिसके चलते कीमती धातुओं के दाम भारी दबाव में आ गए हैं।
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