Bharatmala Project Scam : छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत चल रहे भूमि अधिग्रहण में एक और बड़ा मुआवजा घोटाला सामने आया है। धमतरी जिले के सिवनीकला गांव में फर्जी नामांतरण और जमीनों के अवैध बंटवारे के जरिए करोड़ों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत की गई है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता से आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है।

जानिए क्या है सिवनीकला गांव का पूरा भूमि मुआवजा विवाद मामला
ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड्स में बड़े पैमाने पर कथित रूप से फेरबदल किया गया। इस हेराफेरी का मुख्य उद्देश्य गलत तरीके से करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि को हड़पना था। अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों में हेरफेर कर अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया है।

अवैध रूप से जमीनों के खसरा विभाजन द्वारा मुआवजा राशि की बंदरबांट
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सिवनीकला गांव के लगभग 17 से 18 मूल खसरों को सरकारी रिकॉर्ड में विभाजित कर करीब 90 अलग-अलग हिस्सों में बदल दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कागजों पर लाभार्थियों की संख्या को अधिक दिखाकर बड़ी रकम की निकासी की जा सके। इस नए खुलासे को भारतमाला मुआवजा घोटाले की एक बेहद महत्वपूर्ण और नई कड़ी माना जा रहा है।
सरकारी खजाने को लगाई गई बड़ी चपत
स्थानीय निवासियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में किए गए इन कथित बदलावों के कारण लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये तक की सरकारी राशि का गलत और अवैध भुगतान हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वास्तविक जमीन मालिकों के अधिकारों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया और कुछ रसूखदार लोगों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
भूमि दस्तावेजों और वर्तमान आंकड़ों में भारी विसंगतियां
ग्रामीणों के मुताबिक, साल 2019 में प्रकाशित हुए प्रारंभिक भूमि रिकॉर्ड और बाद में तैयार किए गए दस्तावेजों के बीच कई बड़ी विसंगतियां और गड़बड़ियां दिखाई देती हैं। आरोप है कि अधिसूचना के प्रकाशन के बाद जमीन के नामांतरण और बंटवारे से जुड़े रिकॉर्ड्स में पिछले दरवाजे से बदलाव किए गए, जिसके आधार पर यह भारी-भरकम मुआवजा स्वीकृत करा लिया गया।
भ्रष्ट अधिकारियों और पटवारी की मिलीभगत से घोटाला
इस पूरे मामले में स्थानीय पटवारी, जांच दल और डायवर्सन शाखा से जुड़े कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक संरक्षण और निचले स्तर के कर्मचारियों के सहयोग के बिना इतने बड़े पैमाने पर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव करना किसी भी स्थिति में संभव नहीं था।
अनियमितताओं की पारदर्शी जांच की अपील
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर कार्यालय को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि इस वित्तीय गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे और संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं पर बढ़े सवाल
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से भारतमाला परियोजना में मुआवजे की गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस नए मामले ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, मुआवजा वितरण प्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सिवनीकला गांव की इस शिकायत के बाद अब जांच एजेंसियों की निगरानी और अधिक व्यापक होने की उम्मीद है।
जवाबदेही तय करने की आवश्यकता
यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सीधा असर न केवल सरकारी खजाने पर पड़ेगा, बल्कि उन वास्तविक किसानों और भूमि स्वामियों पर भी पड़ेगा जिनकी जमीनें देश के विकास के लिए अधिग्रहित की गई थीं। ग्रामीणों का मानना है कि भविष्य में ऐसी धांधली को रोकने और व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
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