TMC Internal Crisis 2026 : पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है। पार्टी के भीतर चल रही सियासी उठापटक अब निर्णायक मोड़ लेती दिख रही है, जिससे दिल्ली से लेकर कोलकाता तक हड़कंप मच गया है। शनिवार (13 जून) को पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता और अनुभवी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद से ही बंगाल की राजनीति में बड़े उलटफेर के कयास लगाए जाने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही ताजा खबरों के मुताबिक, टीएमसी के लगभग 20 बागी सांसद आगामी सोमवार (15 जून) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात के दौरान वे स्पीकर के सामने एक ऐसी बड़ी मांग रखने जा रहे हैं, जो टीएमसी के भविष्य को बदल सकती है।

स्पीकर के सामने अलग ब्लॉक बनाने की उठेगी मांग
सोमवार को होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में टीएमसी के असंतुष्ट सांसद लोकसभा के भीतर अपने लिए एक बिल्कुल अलग ब्लॉक (गुट) आवंटित करने की आधिकारिक मांग करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स (एबीपी आनंदा) के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के इन बागी सांसदों को केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पूरा राजनीतिक समर्थन हासिल हो चुका है। एनडीए के इसी मजबूत भरोसे के साथ ये सांसद संसद में एक स्वतंत्र और अलग ब्लॉक के तौर पर मान्यता देने की अपील करेंगे। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस मांग को स्वीकार कर लेते हैं, तो संसद के निचले सदन में इन बागी सांसदों के बैठने की व्यवस्था बदल जाएगी। इन्हें लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक सांसदों से अलग बैठने के लिए सीटें आवंटित की जाएंगी।

दिल्ली में अमित शाह और सुदीप बंदोपाध्याय की गुप्त बैठक
इस बड़े सियासी ड्रामे की स्क्रिप्ट शनिवार सुबह से ही लिखी जाने लगी थी, जब टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय अचानक दिल्ली पहुंचे। दिल्ली आते ही वे अपनी साथी सांसद शताब्दी रॉय के साथ सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित सरकारी आवास पर पहुंचे। वहां दोनों नेताओं ने भूपेंद्र यादव के साथ बंद कमरे में काफी देर तक मंत्रणा की और लोकसभा स्पीकर को भेजे जाने वाले आधिकारिक पत्र पर अपने हस्ताक्षर भी किए। इसके तुरंत बाद, सुदीप बंदोपाध्याय देश के गृहमंत्री अमित शाह से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। अमित शाह और सुदीप के बीच यह बेहद संवेदनशील बैठक करीब 30 मिनट से भी ज्यादा समय तक चली। माना जा रहा है कि इस बैठक में सोमवार को उठाए जाने वाले कदमों की कानूनी और राजनीतिक रूपरेखा तैयार की गई है, जिस पर पत्र पर दस्तखत करने वाले सभी 20 सांसद आगे बढ़ेंगे।
बंगाल चुनाव के बाद से लगातार गहराया आंतरिक संकट
तृणमूल कांग्रेस के भीतर पैदा हुआ यह अभूतपूर्व संकट कोई अचानक हुआ वाकया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गुटबाजी लगातार बढ़ती जा रही थी। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस असंतोष को दबाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। स्थिति इस हद तक खराब हो चुकी है कि टीएमसी पहले ही राज्य विधानसभा के भीतर अपने संसदीय दल पर से अपना सीधा नियंत्रण खो चुकी है। अब विधानसभा के बाद देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में भी पार्टी के भीतर खुली बगावत के संकेत पूरी तरह से साफ और स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिससे ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ममता और अभिषेक की मौजूदगी में ही फूटा था असंतोष
पार्टी के भीतर इस बड़ी टूट की पहली मजबूत पटकथा बीते 1 जून को ही लिख दी गई थी, जब लोकसभा में टीएमसी सांसदों के एक बहुत बड़े धड़े ने खुलकर अपनी ही पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व और कार्यशैली के खिलाफ गहरा असंतोष जाहिर किया था। दिलचस्प बात यह है कि ठीक उसी दिन, जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने आए हुए थे, ठीक उसी वक्त संसद के भीतर टीएमसी सांसदों के आपसी विभाजन और गुटबाजी की खबरें बाहर आ गई थीं। अब यही असंतोष एक औपचारिक विभाजन का रूप लेने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।
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