US Iran Peace Deal : वैश्विक भू-राजनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़ी एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रहे आपसी तनाव को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों शक्तिशाली देश पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की मध्यस्थता और अगुवाई में आगामी 19 जून को इस ऐतिहासिक शांति डील पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बड़े समझौते की शुरुआती खबरें बाजार में आईं, उसी वक्त से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में एक बहुत ही तेज और अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की जाने लगी है।

बीते शुक्रवार को भी कच्चा तेल भारी बिकवाली के कारण लगभग 4 प्रतिशत तक टूट गया था, और आज जैसे ही इस डील का औपचारिक ऐलान हुआ, तेल की कीमतों में एक बार फिर से करीब 4 से 5 फीसदी की बड़ी मंदी देखी गई है। ऐसे में वैश्विक उपभोक्ताओं के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में तेल के दाम और ज्यादा गिरेंगे? आइए इसका पूरा गणित और भविष्य एक्सपर्ट्स के नजरिए से विस्तार से समझते हैं।

केडिया कैपिटल के एक्सपर्ट अजय केडिया का बड़ा दावा
कमोडिटी बाजार के जाने-माने विशेषज्ञ और केडिया कैपिटल के फाउंडर अजय केडिया ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी गहरी आर्थिक समझ साझा की है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर जिस तरह की परिस्थितियां इस वक्त तेजी से बदल रही हैं, उससे साफ है कि खाड़ी देशों के तनाव में अब बड़ी स्थिरता आ रही है। जब भी युद्ध या तनाव की स्थिति शांत होती है, तो कमोडिटी मार्केट से अनिश्चितता के बादल छंट जाते हैं। अजय केडिया के मुताबिक, इस सकारात्मक माहौल के कारण आने वाले अगले 2 महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में और भी ज्यादा बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
तेल के दाम लगातार नीचे की ओर फिसलेंगे और जो क्रूड ऑयल इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में 80 डॉलर के आस-पास मंडरा रहा है, वह बहुत जल्द घटकर 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक आ सकता है। विशेषज्ञ ने जोर देकर कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसा हुआ, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे देश की सरकारी तेल कंपनियों को भारी वित्तीय राहत मिलेगी और घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकते हैं।
बाजार का मौजूदा हाल: बीते शुक्रवार से ही तेल के दामों में दिखने लगा था भारी सुधार
अगर तेल बाजार के हालिया रुख पर नजर डालें, तो बीते शुक्रवार को जब वैश्विक मीडिया में यह पुख्ता खबर तैरने लगी कि ईरान और अमेरिका बहुत जल्द एक समझौते पर सहमत होने वाले हैं, तो तेल बाजार में महीनों से जारी भारी उबाल अचानक शांत होने लगा। रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे भीषण युद्ध के चलते जो कच्चे तेल के भाव एक समय आसमान छूते हुए 127 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए थे, वे इस खबर के आते ही बेहद तेजी से नीचे गिर गए। शुक्रवार को मार्केट बंद होने तक तेल के दाम करीब 4 फीसदी लुढ़क चुके थे, जिसने बाजार को स्थिरता के संकेत दे दिए थे। ठीक वैसा ही रुख इस नए कारोबारी हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार को भी देखने को मिला, जब दोनों देशों के बीच डील फाइनल होने की आधिकारिक पुष्टि की गई।
डील फाइनल होते ही सोमवार को क्रूड और ब्रेंट क्रूड दोनों में मची भारी हाहाकार
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरी तरह तय हो चुका है, और अब यह डील कागजी तौर पर कब पक्की होगी यानी इस पर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष कब साइन करेंगे, इसकी तारीख (19 जून) तय होते ही वैश्विक तेल बाजार ने इस पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। सोमवार 15 जून 2026 की शाम को करीब 8 बजकर 40 मिनट तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम करीब 5 फीसदी की भारी गिरावट के साथ टूटकर सीधे 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए थे। सिर्फ डब्ल्यूटीआई ही नहीं, बल्कि वैश्विक बेंचमार्क माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड भी करीब इतनी ही बड़ी गिरावट के साथ 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई से राहत मिलने का एक बड़ा संकेत है।
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