West Bengal Politics : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व टीएमसी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने किया, जिसमें कल्याण बनर्जी, डेरेक ओब्रायन, महुआ मोइत्रा और सौगत राय जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य टीएमसी के 20 बागी सांसदों द्वारा पार्टी के खिलाफ की गई गतिविधियों और उनके कथित ‘विलय’ को असंवैधानिक करार देना था। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष औपचारिक रूप से 20 याचिकाएं पेश कीं, जिनमें इन बागी सांसदों को संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित करने की पुरजोर मांग की गई है।

‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) के दावे पर सवाल
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों ने खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है, उन्होंने ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नामक एक अज्ञात पार्टी में शामिल होने का दावा किया है। बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि यह एक ऐसी पार्टी है जिसका नाम न तो आम जनता ने सुना है और न ही उन बागी सांसदों को खुद इस पार्टी की पृष्ठभूमि की कोई जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मात्र किसी काल्पनिक पार्टी में शामिल होने का दावा कर देने से वे सांसद अयोग्यता से नहीं बच सकते।

संवैधानिक प्रावधान और दल-बदल विरोधी कानून की व्याख्या
अभिषेक बनर्जी ने जोर देकर कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधान बेहद स्पष्ट हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई सांसद स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह स्वतः ही सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि दल-बदल कानून के तहत दो-तिहाई सदस्यों के किसी अन्य पार्टी में विलय का नियम पूरी राजनीतिक पार्टी पर लागू होता है, न कि केवल विधायी दल या सांसदों के किसी गुट पर। बनर्जी के अनुसार, चूंकि टीएमसी एक अखंड राजनीतिक दल है, इसलिए सांसदों का यह तथाकथित विलय असंवैधानिक और कानून के विरुद्ध है। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे इन याचिकाओ पर निष्पक्ष सुनवाई करते हुए न्याय प्रदान करें।
लोकसभा स्पीकर की भूमिका और टीएमसी की चेतावनी
यह महत्वपूर्ण मुलाकात लोकसभा स्पीकर द्वारा अभिषेक बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए दिए गए आमंत्रण के बाद हुई है। गौरतलब है कि टीएमसी के बागी सांसदों ने खुद को NCPI के साथ विलय के बाद एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। इसे लेकर बनर्जी ने पिछले सप्ताह ही स्पीकर को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया था कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के भीतर किसी भी ‘अलग गुट’ को न तो कोई दर्जा दिया जाना चाहिए और न ही कोई आधिकारिक सुविधा। टीएमसी का रुख स्पष्ट है कि संविधान और दल-बदल कानून मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर किसी भी प्रकार के विभाजनकारी गुट को मान्यता नहीं देते हैं। अब सबकी नजरें स्पीकर के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वे दल-बदल विरोधी कानून का कड़ाई से पालन करते हुए इन बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
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