Strait of Hormuz : ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने शनिवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण घोषणा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पुनः बंद करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लेबनान में जारी इजरायली हमले और अमेरिकी प्रशासन पर ‘बदनीयती’ का आरोप है। ईरान का मानना है कि अमेरिका ने उन वादों को स्पष्ट रूप से तोड़ा है, जो युद्धविराम और शांति बहाली के लिए किए गए थे। सरकारी टेलीविजन पर जारी बयान में ईरान ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि आक्रामकता का यह दौर थमता नहीं है, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए भविष्य में और अधिक कठोर कदम उठाने की योजना बना रहा है।

इजरायली हमले से उपजा गहरा संकट और अमेरिका पर सवाल
यह तनाव तब और गहरा गया जब शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में दो बच्चों सहित कम से कम 16 लोगों की जान चली गई। ये हमले उस समय हुए जब क्षेत्र में संघर्ष-विराम समझौते की उम्मीदें जगी थीं। लेबनान में लगातार हो रही मौतों ने अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह की शुरुआत में हुए अंतरिम समझौते को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। ईरान का तर्क है कि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहा है। सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, ईरान का रुख स्पष्ट है कि यदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन जारी रहता है, तो ईरान को अपनी रक्षा में कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

ईरान का कूटनीतिक रुख और स्विट्जरलैंड यात्रा का महत्व
इस बीच, ईरान की वार्ताकार टीम स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो रही है। यह यात्रा पहले शुक्रवार को निर्धारित थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रद्द कर दी गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल अपनी मांगों को दोहराने के लिए है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका समझौते के मुख्य वादों—विशेषकर लेबनान में लड़ाई को पूरी तरह समाप्त करने—का पालन नहीं करता, तब तक किसी भी सार्थक बातचीत की संभावना कम है। बाघेई ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इन समझौतों का पालन नहीं किया गया, तो संपूर्ण ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ संकट में पड़ जाएगा और बातचीत का कोई आधार नहीं बचेगा।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता युद्ध का खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा झटका है। कुछ ही दिन पहले अंतरिम समझौते के बाद जब जहाजों की आवाजाही शुरू हुई थी, तो दुनिया ने राहत की सांस ली थी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने फिर से मध्य पूर्व को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक वादों के टूटने से क्षेत्र में युद्ध का दायरा बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है। वैश्विक समुदाय इस स्थिति को बड़ी चिंता के साथ देख रहा है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह गतिरोध न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को प्रभावित कर सकता है।










