Amit Shah 3D Campaign : नक्सलवाद के लगभग पूर्ण उन्मूलन के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी अवैध घुसपैठ की समस्या पर पूरी ताकत के साथ जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक समयबद्ध और आक्रामक कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए गृह मंत्री ने ‘डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट’ (पहचान करना, हिरासत में लेना और वापस भेजना) के तीन-सूत्रीय ‘डी’ मंत्र पर आधारित एक व्यापक रणनीति लागू की है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर कड़ी निगरानी रख रही है।

सीमा सुरक्षा में ‘जीरो इनफिल्ट्रेशन’ और तकनीकी ग्रिड का जाल
गृह मंत्री अमित शाह ने सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए ‘जीरो इनफिल्ट्रेशन’ की नीति अपनाई है। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने राजस्थान, गुजरात और त्रिपुरा का दौरा कर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की है और शीघ्र ही वे पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे। सीमाओं पर घुसपैठ और तस्करी के पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक करने के लिए ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ के तहत अत्याधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन, रडार, थर्मल कैमरे और सेंसर का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, सीमा सुरक्षा बल (BSF) का अधिकार क्षेत्र सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया गया है ताकि घुसपैठियों और तस्करों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

‘डेमोग्राफी मिशन’ और जनसांख्यिकीय बदलावों पर पैनी नज़र
सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की गहन जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय ‘डेमोग्राफी मिशन’ का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं। यह समिति सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण आबादी के संतुलन में आए बदलावों का एक वर्ष के भीतर अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर भविष्य में सख्त नीतियां बनाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को चिह्नित कर उन्हें ध्वस्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का कार्य मिशन मोड में तेज कर दिया गया है।
स्थानीय प्रशासन की भागीदारी और स्वैच्छिक वापसी का विकल्प
इस सुरक्षा अभियान को प्रभावी बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने केंद्रीय बलों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन, राज्य पुलिस और पंचायत स्तर के अधिकारियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। डिजिटल जनगणना के माध्यम से एकत्रित सटीक डेटा भी अवैध निवासियों की पहचान करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। गृह मंत्री ने एक बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि जो घुसपैठिए स्वेच्छा से अपने देश वापस लौट जाएंगे, उनके खिलाफ कोई कानूनी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस मिशन का उद्देश्य न केवल अवैध घुसपैठ को रोकना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता न हो। सरकार हर एक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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