West Bengal news : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए कानूनी मोर्चे पर मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। हाल ही में उन्होंने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, जिसके लिए उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के लिए अभिषेक के वकीलों ने जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के समक्ष जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने इस पर तत्काल विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया और लिस्टिंग के अनुसार ही होगी, जिसके चलते अब इस पर अगले हफ्ते सोमवार को सुनवाई होगी।

विदेश जाने के लिए कोर्ट की मंजूरी क्यों है जरूरी?
अभिषेक बनर्जी की आंखों में पुरानी चोट के कारण जटिल समस्याएं हैं, जिसके लिए उन्हें बार-बार विदेश में सर्जरी और विशेष उपचार की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, उन पर चल रहे कुछ कानूनी मामलों के चलते कोर्ट ने उन पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए हुए हैं। कोर्ट के एक पुराने आदेश के अनुसार, अभिषेक बनर्जी बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ सकते। इसी आदेश में ढील पाने के लिए उन्होंने याचिका दायर की है, ताकि वह अपनी बाईं आंख के इलाज के लिए एक सप्ताह के लिए विदेश जा सकें। उन्हें अपनी यात्रा के बारे में जांच अधिकारी को कम से कम 48 घंटे पहले सूचित करने का भी निर्देश दिया गया है।

क्या है अभिषेक बनर्जी की आंखों की समस्या का इतिहास?
अभिषेक बनर्जी की आंखों की यह समस्या अक्टूबर 2016 में हुए एक भीषण सड़क हादसे का परिणाम है। दुर्गापुर एक्सप्रेसवे पर सिंगूर के पास हुई दुर्घटना में उनकी बाईं आंख के नीचे गंभीर चोट आई थी और हड्डी भी टूट गई थी। तब से वह लगातार आंखों की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने देश के विभिन्न अस्पतालों के अलावा दुबई, सिंगापुर और अमेरिका जैसे देशों में भी अपनी सर्जरी और इलाज करवाए हैं। उनकी बाईं आंख की कई बार सर्जरी हो चुकी है, जिसके कारण मेडिकल आधार पर उन्हें नियमित अंतराल पर विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता बनी रहती है।
राजनीतिक विवादों और कानूनी दांव-पेच में घिरे सांसद
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का सिलसिला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद काफी तेज हुआ है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक मंचों से भड़काऊ बयान देने के आरोप लगे हैं, जिसके संबंध में 15 मई को एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच के दौरान अदालत ने 22 मई को अभिषेक को 31 जुलाई या अगले आदेश तक गिरफ्तारी से सुरक्षा तो प्रदान की थी, लेकिन साथ ही उन पर कड़ी शर्तें भी लागू कर दी थीं। यही कारण है कि उन्हें हर बार विदेश यात्रा के लिए कोर्ट से औपचारिक अनुमति लेनी पड़ती है।
भविष्य की राह और कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल अभिषेक बनर्जी की नजरें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि मेडिकल आधार को देखते हुए कोर्ट का रुख सकारात्मक हो सकता है, लेकिन यात्रा की अनुमति प्रक्रियात्मक देरी के अधीन है। टीएमसी के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के कई नेता कानूनी और राजनीतिक जांच का सामना कर रहे हैं। अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति का मामला अब सीधे तौर पर उनके उपचार और कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों के बीच झूल रहा है।
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