Khawaja Asif On India: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत के खिलाफ अपनी हताशा जाहिर करते हुए एक विवादित और निराधार बयान दिया है। उन्होंने हाल ही में अफगानिस्तान से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में हुए ड्रोन हमलों के लिए भारत को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। एक टीवी साक्षात्कार के दौरान, जब उनसे भारत द्वारा अफगानिस्तान को भेजी गई मानवीय सहायता (दवाइयों) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी साक्ष्य के यह दावा कर दिया कि इसमें “100 फीसदी सच्चाई” हो सकती है कि भारत ने दवाइयों की आड़ में ड्रोन और हथियार भेजे हैं। उनका यह बयान न केवल कूटनीतिक मर्यादा के विपरीत है, बल्कि पाकिस्तान की उस पुरानी आदत को भी दर्शाता है जिसमें वह अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए हमेशा भारत को बलि का बकरा बनाता है।

मानवीय सहायता को ‘षड्यंत्र’ बताने की पाकिस्तानी कुत्सित कोशिश
इस पूरे विवाद की जड़ भारत द्वारा अफगानिस्तान को भेजी गई 5 टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप है। भारत मानवीय आधार पर लंबे समय से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान की जनता को सहायता प्रदान कर रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। परंतु, पाकिस्तान ने इस नेक कार्य को एक संदिग्ध मोड़ देने की कोशिश की है। पाकिस्तान का तर्क है कि भारत ने दवाइयों की खेप के अगले ही दिन हुए ड्रोन हमलों को अंजाम दिया है। वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान के इन प्रांतों में लंबे समय से सक्रिय सशस्त्र विद्रोही गुटों और तालिबान के साथ बढ़ते तनाव के कारण सीमा पर स्थिति अस्थिर है। अपनी सुरक्षा नीतियों की विफलता को छिपाने के लिए पाकिस्तान अब भारत के मानवीय कार्यों को भी ‘हथियारों की आपूर्ति’ बताने जैसा भ्रामक दुष्प्रचार कर रहा है।

तालिबान के जवाबी हमलों से बौखलाया पाकिस्तान
पाकिस्तान की एयरफोर्स ने हाल के दिनों में काबुल और कंधार समेत अफगानिस्तान के कई इलाकों में बमबारी की है, जिससे तालिबान सरकार और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहद तल्ख हो गए हैं। तालिबान ने पाकिस्तान की इस आक्रामकता का जवाब ड्रोन हमलों के जरिए दिया है, जो यह साबित करता है कि अब अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। पाकिस्तान इस बढ़ते तनाव और अपने ही घर (बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा) में पनप रहे विद्रोह को नियंत्रित करने में बुरी तरह विफल रहा है। सीमा पर गोलीबारी और सैन्य झड़पों के बीच भारत को घसीटकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान भटकाने की असफल कोशिश कर रहा है।
क्षेत्रीय अस्थिरता और पाकिस्तान का विफल सुरक्षा तंत्र
पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में विद्रोही समूहों की सक्रियता पाकिस्तान के लिए एक पुराना और विकट सुरक्षा संकट है। इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिनसे निपटने के बजाय पाकिस्तान का रक्षा तंत्र भारत पर आरोप लगाने को अपनी प्राथमिकता मान बैठा है। भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण पड़ोस और मानवीय सहयोग की नीति अपनाई है, जबकि पाकिस्तान का यह हालिया बयान उसके अस्थिर नेतृत्व और भारत-विरोधी मानसिकता को ही उजागर करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब पाकिस्तान के ऐसे निराधार आरोपों को गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि वे किसी भी प्रकार के तथ्यात्मक प्रमाण से कोसों दूर होते हैं।
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