Bhilai CISF DIG Transfer : भिलाई इस्पात संयंत्र में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई, डीआईजी नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी हटाए गए

Bhilai CISF DIG Transfer  : छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में करोड़ों रुपये के चर्चित स्क्रैप चोरी मामले के बाद सुरक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पुनर्गठित करने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के भिलाई इकाई के डीआईजी नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया गया है। आधिकारिक आदेशों के अनुसार, त्रिपाठी को अब दिल्ली स्थित सीआईएसएफ मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई संयंत्र के अंदर हुई व्यापक स्तर पर स्क्रैप चोरी की घटनाओं और सुरक्षा में बरती गई कथित लापरवाही के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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आईपीएस नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी का परिचय और पद से हटना

नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी, जो कि 2009 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, वर्तमान में सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात थे। डीआईजी के रूप में उनकी भूमिका भिलाई इस्पात संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की थी। हालांकि, संयंत्र में लगातार हो रही स्क्रैप की चोरी और इसे लेकर बढ़ते सवालों के बाद प्रशासन ने उन्हें पद से हटाने का निर्णय लिया है। उनकी कार्यप्रणाली और सुरक्षा घेरे में हुई चूक के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि आने वाले दिनों में भिलाई में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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आईपीएस चंदन कुमार झा संभालेंगे भिलाई की नई कमान

नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी के स्थान पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस अधिकारी चंदन कुमार झा को भिलाई का नया डीआईजी नियुक्त किया है। चंदन कुमार झा की पृष्ठभूमि बोकारो स्टील प्लांट में एसपी के रूप में कार्य करने की रही है, जिसके चलते उन्हें औद्योगिक संयंत्रों की सुरक्षा और वहां होने वाली चोरियों के प्रबंधन का गहरा अनुभव है। सीआईएसएफ के जवानों और संयंत्र के अन्य कर्मियों के बीच इस नियुक्ति को लेकर काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि झारखंड कैडर से आए झा की कार्यकुशलता संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था को फिर से दुरुस्त करने में मदद करेगी।

स्क्रैप चोरी मामले में मिलीभगत की गहरी आशंका

भिलाई इस्पात संयंत्र में करोड़ों के स्क्रैप की चोरी बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं थी, ऐसा सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है। यह संयंत्र सेल (SAIL) की एक प्रमुख इकाई है, जहां सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। हाल ही में इस मामले में मुख्य आरोपी संजय सिंह सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले में संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सीआईएसएफ के जवानों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। सुरक्षाकर्मियों से की गई पूछताछ में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसके बाद से ही संयंत्र के सुरक्षा अमले में हड़कंप मचा हुआ है।

जांच और सुरक्षा में सुधार के लिए कड़े कदम

प्रशासन द्वारा की गई यह बड़ी फेरबदल सुरक्षा के प्रति सरकार की सख्ती को दर्शाती है। स्क्रैप चोरी मामले में हुई गिरफ्तारियों ने साबित कर दिया है कि संयंत्र के भीतर एक संगठित गिरोह सक्रिय था। आने वाले दिनों में नए डीआईजी चंदन कुमार झा के सामने सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बड़ी चुनौती होगी। उम्मीद की जा रही है कि नए नेतृत्व के साथ, संयंत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए डिजिटल निगरानी और गश्त प्रणाली को और भी अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

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Chandan Das

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