Synthetic Paneer : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शादी-समारोहों, होटलों और रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बाजार में असली और पौष्टिक पनीर की जगह कम लागत वाला ‘सिंथेटिक पनीर’ तेजी से अपनी जगह बना रहा है। दिखने में यह बिल्कुल असली पनीर जैसा होता है, जिसके कारण आम ग्राहक धोखा खा जाते हैं। खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, होटल संचालक और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोग मुनाफा कमाने के लिए लागत कम करने के उद्देश्य से इसका उपयोग कर रहे हैं। हालांकि सिंथेटिक पनीर का निर्माण या बिक्री अपने आप में गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसे असली बताकर बेचना या परोसना खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है।
क्या है सिंथेटिक पनीर और क्यों होता है इस्तेमाल?
सिंथेटिक पनीर पारंपरिक रूप से दूध से नहीं बनाया जाता। इसे पाम ऑयल, स्टार्च, सोया प्रोटीन और अन्य रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसकी कीमत असली पनीर के मुकाबले काफी कम होती है। जहाँ शुद्ध दूध का पनीर बाजार में 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, वहीं सिंथेटिक पनीर मात्र 250 से 300 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध हो जाता है। कम कीमत के लालच में ढाबे और रेस्टोरेंट वाले इसे असली पनीर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी बनावट और रंग को इतना सटीक रखा जाता है कि साधारण ग्राहक इसके स्वाद और गुणवत्ता में अंतर नहीं कर पाता।
खाद्य सुरक्षा विभाग के नियम और कानूनी प्रावधान
दुर्ग के खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी जितेंद्र नेले के अनुसार, FSSAI के नियमों के तहत सिंथेटिक पनीर एक ‘एनालॉग उत्पाद’ है, जो मान्य तो है लेकिन इसे असली पनीर के नाम पर बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। नियमों के मुताबिक, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने मेनू कार्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि वे असली पनीर का उपयोग कर रहे हैं या सिंथेटिक उत्पाद का। यदि कोई संचालक ग्राहकों को अंधेरे में रखता है, तो उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आम लोगों ने अब प्रशासन से इन स्थानों की नियमित जांच और कड़ाई से नियमों के पालन की मांग की है।
असली बनाम सिंथेटिक पनीर की पहचान कैसे करें?
सिंथेटिक और असली पनीर में फर्क करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर आप ठगे जाने से बच सकते हैं। असली पनीर मुलायम होता है और दबाने पर आसानी से टूट जाता है, जबकि सिंथेटिक पनीर में रबड़ जैसा खिंचाव महसूस होता है। गर्म करने पर असली पनीर से दूध की स्वाभाविक खुशबू आती है, जबकि सिंथेटिक उत्पाद से तेल की गंध या अजीब सी महक आ सकती है। बाहर खाना खाते समय हमेशा वेटर या संचालक से पनीर की गुणवत्ता के बारे में पूछताछ करें। वहीं, पैक्ड पनीर खरीदते समय लेबल पर ‘एनालॉग प्रोडक्ट’ या ‘नॉन-डेयरी अल्टरनेटिव’ जैसे शब्दों की जांच अवश्य करें।
सेहत पर सिंथेटिक पनीर का दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि इसमें दूध का कोई भी पौष्टिक तत्व, जैसे प्रोटीन या कैल्शियम नहीं होता। इसमें मौजूद पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं, जो हृदय संबंधी रोगों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। साथ ही, अधिक स्टार्च के सेवन से वजन बढ़ने और पेट संबंधी पाचन समस्याओं का खतरा भी बना रहता है। इसलिए, उपभोक्ताओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और खाद्य सामग्री की शुद्धता के बारे में सुनिश्चित होने की सलाह दी गई है। सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा तरीका जानकारी प्राप्त करना और सतर्कता बरतना है।
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