Ram Mandir News : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए दान और आभूषणों में कथित गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण में कार्रवाई करते हुए शुक्रवार, 26 जून को अदालत ने गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांचकर्ताओं ने अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये की बड़ी नकद राशि बरामद करने का दावा किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हैं, हालांकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इनकार किया है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आक्रोश: ‘चोरों को मिलेगा महादंड’
इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने दान पात्र में हुई चोरी को करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया है। शास्त्री ने कहा, “रावण ने माता जानकी का अपहरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे कुल का विनाश था। ठीक उसी तरह, जो लोग राम मंदिर के दान को चुराएंगे, वे न केवल सरकारी दंड के भागीदार बनेंगे, बल्कि उन्हें ईश्वर का महादंड भी भोगना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उम्मीद है कि जांच में सभी दोषी पकड़े जाएंगे। उन्होंने उन लोगों को ‘आधुनिक रावण’ की संज्ञा दी, जिन्होंने अपनी श्रद्धा का चोला पहनकर जन-आस्था को लूटा है।

सत्ता और विपक्ष में छिड़ा राजनीतिक ‘लंकाकांड’
राम मंदिर का यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को घेरा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा का ‘लंकाकांड’ बताया, तो वहीं कांग्रेस ने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने इसे ‘धर्मयुद्ध’ करार देते हुए दोषियों के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है।
साजिश के आरोपों के बीच एसआईटी की जांच जारी
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इसे सपा और कांग्रेस की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि यह एफआईआर ट्रस्ट के ही सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही यह कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि 7 जून को अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद से ही अयोध्या का यह मंदिर परिसर सुर्खियों में बना हुआ है, और अब एसआईटी की जांच ही इस पूरे ‘चंदा चोर’ प्रकरण की असली सच्चाई सामने लाएगी।










