Ram Mandir Scam: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में दान में मिले धन के कथित गबन और हेराफेरी के आरोपों ने पूरे देश में चर्चा का विषय छेड़ दिया है। इस संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस अब सीधे तौर पर सक्रिय हो गई है। पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया है। यह दल मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन करेगा और मंदिर प्रबंधन तथा संबंधित अधिकारियों से इस कथित गबन के आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण मांगेगा।

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अयोध्या यात्रा की योजना
कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए एक मजबूत टीम का गठन किया है, जो जमीनी स्तर पर जाकर स्थिति का जायजा लेगी। पार्टी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल की कमान उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के हाथों में है। उनके साथ अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा, सीतापुर के राकेश राठौर, प्रयागराज के उज्ज्वल रमण सिंह और बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया शामिल हैं। इस बड़े दल में पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, पूर्व एमएलसी दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम जैसे अनुभवी नेता भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कांग्रेस का यह कदम स्पष्ट करता है कि पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

अयोध्या पहुंचने से पहले ही अजय राय नजरबंद
दौरे की योजना को लेकर स्थानीय प्रशासन को काफी पहले सूचित कर दिया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। हालांकि, कांग्रेस की यह यात्रा शुरू होने से पहले ही विवादों और प्रशासनिक सख्ती की भेंट चढ़ गई। देर रात मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में पुलिस प्रशासन ने नजरबंद कर दिया है। पार्टी सूत्रों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। इस अचानक हुई कार्रवाई ने सियासी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
राजनीतिक घमासान और आगे की राह
अयोध्या में कांग्रेस नेताओं को रोके जाने और नजरबंदी की इस घटना को लेकर विपक्षी दल योगी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान से जुड़े धन में हेराफेरी के आरोपों को छिपाने के लिए सरकार प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है। वहीं, स्थानीय प्रशासन इस कार्रवाई को शांति व्यवस्था बनाए रखने का एक हिस्सा बता रहा है। बहरहाल, राम मंदिर में दर्शन करने और दान विवाद की जांच की मांग को लेकर निकले कांग्रेसी नेताओं का अगला कदम क्या होगा, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। क्या प्रशासन उन्हें दर्शन की अनुमति देगा या यह मामला आने वाले दिनों में बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप लेगा? इस घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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