Bihar Politics : बिहार की राजनीति में दशकों तक सत्ता का केंद्र रहे पटना स्थित ’10 सर्कुलर रोड’ का सरकारी बंगला अब एक नई पहचान की ओर बढ़ चला है। मंगलवार को इस बंगले से सबसे प्रतीकात्मक बदलाव तब देखने को मिला, जब मुख्य द्वार पर बरसों से लगा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘लालटेन’ हटा दिया गया। यह लालटेन केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक रसूख और इस आवास की पहचान थी। इसके हटने के बाद अब यह सरकारी आवास अपनी पुरानी राजनीतिक चमक खो चुका है, जो बिहार की बदलती राजनीतिक फिजा को बयां कर रहा है।

समयसीमा के भीतर सामान की शिफ्टिंग जारी
भवन निर्माण विभाग द्वारा दी गई आखिरी समयसीमा के समाप्त होने के साथ ही, इस बंगले को खाली करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। रविवार देर शाम से ही मजदूरों ने घर का सामान नए स्थान पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया था। सुरक्षा के मद्देनजर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को भी हटा लिया गया है। राजद सूत्रों के अनुसार, राबड़ी देवी का निजी सामान पटना के कौटिल्य नगर स्थित उनके निजी आवास में स्थानांतरित किया जा रहा है। सरकार ने अब राबड़ी देवी को हार्डिंग रोड स्थित मकान संख्या-39 आवंटित किया है, जहाँ वे अपना नया ठिकाना बनाएंगी।

चार नोटिस के बाद पूरी हुई बंगला खाली करने की प्रक्रिया
यह कार्रवाई भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी किए गए चार लगातार नोटिसों के बाद अमल में आई है। उल्लेखनीय है कि विभाग ने 27 मई को ही 10 सर्कुलर रोड वाले इस बंगले का आवंटन राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम के नाम कर दिया था। विभाग द्वारा दी गई तमाम डेडलाइन्स के गुजर जाने के बाद, अब औपचारिक रूप से यह सरकारी आवास नए मंत्री नंद किशोर राम को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह बदलाव प्रशासनिक अनुशासन और सरकार के सख्त रुख को दर्शाता है।
सुरक्षा घेरे में कटौती: लालू परिवार के लिए बड़ा झटका
इस बंगला खाली करने की प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही नीतीश सरकार ने लालू यादव और राबड़ी देवी को एक और बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के सुरक्षा घेरे (सिक्योरिटी कवर) में कटौती कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में एक बड़े ‘पावर शिफ्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है। सत्ता के गलियारों में अब इस बंगले के साथ-साथ लालू परिवार के घटते राजनीतिक दबदबे की चर्चाएं जोर-शोर से चल रही हैं, जो आगामी समय में राज्य की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं।
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