Ram Mandir Scam : अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर पुरवा, उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनिल सिंह का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विधायक ने मंदिर की पवित्रता को निशाना बनाने वालों को सीधे शब्दों में कड़ा चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी प्रभु राम के मंदिर की दान राशि के साथ खिलवाड़ करेगा, उसे दैवीय दंड का सामना करना पड़ेगा। अनिल सिंह ने दावा किया कि ऐसे लोगों को लाइलाज कैंसर जैसी बीमारी होगी और उन्हें प्रभु राम की तरफ से सीधे ‘सजा-ए-मौत’ मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि एक साल के भीतर ही इन लोगों की हालत दयनीय हो जाएगी और वे तिल-तिल कर मरेंगे।

सपा पर साधा निशाना, अखिलेश यादव को घेरा
विधायक अनिल सिंह ने इस मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को ‘चुट्टे चोर’ बताते हुए उन पर जमीन हड़पने, राशन बेचने और गरीबों का हक मारने जैसे गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आज अखिलेश यादव भी राम का नाम लेने के लिए मजबूर हो गए हैं, क्योंकि बिना राम के नाम के उनका कोई काम नहीं चल रहा है। उन्होंने चुनौती दी कि भाजपा सरकार ऐसे दोषियों को इतना कठोर दंड देगी कि उनकी आने वाली सात पीढ़ियां इसे याद रखेंगी और इतिहास में उनके परिवार को भी इस शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।

चंपत राय के बयान और जांच की प्रक्रिया
इस पूरे प्रकरण में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका पर भी चर्चाएं तेज हैं। आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है। जांच का नेतृत्व कर रहे अयोध्या के क्षेत्राधिकारी (सीओ) आशुतोष तिवारी ने स्वयं कारसेवकपुरम स्थित चंपत राय के आवास ‘भारत कुटी’ पहुंचकर उनसे पूछताछ की। हालांकि, पूछताछ की अवधि और बारीकियों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने चंपत राय से वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज और महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां इस बात की गहन पड़ताल कर रही हैं कि ट्रस्ट को कथित गबन के बारे में कब पता चला और उन्होंने इस पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की।
इस्तीफे और प्राथमिकी में देरी पर उठे सवाल
इस मामले में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खबरों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही चंपत राय ने इस विवाद की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेते हुए अपना इस्तीफा सौंपा था। दावा किया जा रहा है कि ट्रस्ट को 7 जून से पहले ही कथित अनियमितता की भनक लग गई थी, लेकिन प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में देरी हुई और यह मामला 25 जून को दर्ज किया गया। जांच में पांच जून का एक वीडियो भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के घर से दान राशि से भरा बैग बरामद होने का दावा किया गया है। अब जांच का दारोमदार इस पर है कि पुलिस इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाती है।












