US Israel Relations : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐतिहासिक और साहसी नीतिगत बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि उनका देश अब अमेरिकी वित्तीय सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहता। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजराइल की अर्थव्यवस्था अब इतनी सुदृढ़ और सक्षम हो चुकी है कि उसे किसी भी विदेशी सब्सिडी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस प्रक्रिया को इसी साल से शुरू करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, अमेरिकी सहायता को ‘कल्याणकारी योजनाओं’ के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि इजराइल अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के उस हिस्से से खुद को वित्तपोषित करने में पूरी तरह सक्षम है, जो वर्तमान में उसे अमेरिका से प्राप्त होता है। यह निर्णय इजराइल की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक मंच पर उसकी स्वतंत्र पहचान को दर्शाता है।

फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना पर अडिग विरोध
क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों पर बात करते हुए, नेतन्याहू ने अपनी पुरानी नीति को दोहराते हुए फिलिस्तीनी राज्य के गठन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजराइल केवल ‘यहूदी लोगों का राष्ट्र-राज्य’ है और किसी भी स्थिति में वहां फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होने दी जाएगी। अपनी इस नीतिगत अडिगता के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि इजराइल की सुरक्षा और उसकी राष्ट्रीय पहचान उसके लिए सर्वोपरि है। गाजा पट्टी में बस्तियों के पुनर्वसन से जुड़े सवालों पर उन्होंने कूटनीतिक चुप्पी साधे रखी, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि सरकार इस दिशा में जमीनी कार्रवाई को बातचीत से अधिक प्राथमिकता देती है।

आक्रामक सुरक्षा नीति और सक्रिय रक्षा तंत्र
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा के मोर्चे पर ‘सक्रिय’ बने रहने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इजराइल अब केवल बाड़ के पीछे छिपकर निष्क्रिय रक्षात्मक नीति नहीं अपनाएगा, बल्कि दुश्मनों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करेगा। यह नीति न केवल सीमाओं की सुरक्षा के लिए है, बल्कि उन खतरों को जड़ से खत्म करने के लिए भी है जो देश की अखंडता को चुनौती देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बल किसी भी कीमत पर देश की संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे और बाहरी शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।
ईरान और हिज़्बुल्लाह को सीधी चेतावनी
तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों और लेबनान में सक्रिय आतंकी गुटों पर निशाना साधते हुए नेतन्याहू ने दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इजराइल अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए ईरान के भीतर भी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो इजराइल तीसरी बार भी ईरान में प्रवेश करेगा। इसके अतिरिक्त, लेबनान के अंदर 10 किलोमीटर के सुरक्षा घेरे की पुष्टि करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तरी सीमा पर सैन्य उपस्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक कि सीमा पार से आने वाले सभी खतरों का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन कला केवल दिखावे की नहीं, बल्कि ठोस और परिणामोन्मुखी रणनीतिक फैसलों की है।
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