Jagannath Puri Tradition : ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर न केवल चार धामों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, बल्कि यह अपनी अलौकिक परंपराओं और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का भक्तों को साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रथयात्रा के दौरान भगवान के रथ की रस्सियों को खींचने मात्र से भक्तों के अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष यह भव्य रथयात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक संपन्न होगी, जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेंगे।

बेंत मारने की अजीब लेकिन भक्तिपूर्ण रस्म
जगन्नाथ पुरी मंदिर में कई ऐसी परंपराएं हैं जो सुनने में अनोखी लग सकती हैं, लेकिन उनके पीछे गहरा आध्यात्मिक महत्व छिपा है। ऐसी ही एक अनूठी परंपरा है भक्तों को प्रसाद के रूप में ‘बेंत’ मारना। यह रस्म भगवान श्रीकृष्ण के बालपन की लीलाओं से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अपने बचपन में अत्यंत नटखट और चंचल थे। उनकी इन शरारतों से तंग आकर माता यशोदा अक्सर उन्हें डांटती थीं और कभी-कभी तो अनुशासन सिखाने के लिए उन्हें बेंत से भी मारती थीं। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण को बेंत अत्यंत प्रिय है, इसलिए पुरी के मंदिर में इसे भगवान के पास रखा जाता है। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को पुजारी इसी बेंत से हल्का स्पर्श करते हैं, जिसे प्रसाद का एक विशेष स्वरूप माना जाता है।

मोक्ष और सकारात्मकता का प्रतीक है बेंत का प्रसाद
भक्तों के बीच यह मान्यता बेहद गहरी है कि जिस श्रद्धालु को पुजारी के हाथों इस विशेष बेंत का स्पर्श मिलता है, उसके जीवन के सभी संचित पापों का तत्काल नाश हो जाता है। माना जाता है कि यह बेंत न केवल पापों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि भक्त के जीवन को एक सही दिशा भी प्रदान करती है, जिससे उनके दुखों में कमी आती है। यह बेंत विशेष रूप से नारियल की लकड़ी से निर्मित की जाती है। भक्त इसे केवल एक रस्म नहीं, बल्कि साक्षात भगवान का आशीर्वाद मानते हैं। कई श्रद्धालु जगन्नाथ पुरी यात्रा से लौटते समय इस बेंत को अपने साथ घर ले जाना नहीं भूलते।
घर में बेंत रखने के आध्यात्मिक लाभ
पुरी के इस अनूठे प्रसाद के प्रति लोगों की आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे इसे अपने घर के मंदिर में स्थापित करना शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में रखे इस बेंत की नियमित पूजा करने और इसे परिवार के सभी सदस्यों को स्पर्श कराने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह परिवार के सदस्यों के बीच सुख-शांति और सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है। जगन्नाथ पुरी की यह परंपरा न केवल भगवान और भक्त के बीच के उस प्रेम और शरारत के रिश्ते को जीवंत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ईश्वर की हर लीला के पीछे कोई न कोई कल्याणकारी उद्देश्य अवश्य होता है।
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