Kanker Land Encroachment : उत्तर बस्तर कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां ग्राम पीवी-09 सत्यानंदपुर के ग्रामीण शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे को लेकर लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की करीब 12 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने लंबे समय से कब्जा कर रखा है। इस अतिक्रमण से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि यह जमीन सामुदायिक कार्यों और गांव के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से तंग आकर अब ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पखांजूर तहसीलदार को एक कड़ा आवेदन सौंपा है और अतिक्रमण हटाने की पुरजोर मांग की है।

खसरा नंबरों का विवरण और प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली
ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार को सौंपे गए आवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि खसरा नंबर 129, 130, 133, 138 और 161 की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने काफी पहले की थी, जिसके बाद 24 अप्रैल 2026 को तहसील कार्यालय ने संबंधित हल्का पटवारी को निर्देश दिए थे कि वे मौके पर जाकर जांच करें और पंचनामा तैयार कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हालांकि, आश्चर्य की बात यह है कि विभागीय निर्देशों के कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो जांच पूरी हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की इस सुस्त कार्यप्रणाली और टालमटोल के रवैये के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

जनहित के कार्यों के लिए जमीन मुक्त कराने की ग्रामीणों की जिद
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन अपनी पुरानी जांच प्रक्रिया को तुरंत गति प्रदान करे और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए। उनका कहना है कि यह जमीन ग्राम पंचायत की संपत्ति है, जिसका उपयोग जनहित और विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए था, लेकिन अवैध कब्जे के कारण गांव की प्रगति बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जमीन को शासन के कब्जे में लेकर जनहित में उपयोग नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासन का आश्वासन: नियमानुसार होगी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पखांजूर के तहसीलदार केतन कुमार भोयर ने स्वीकार किया कि उन्हें शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग ने इस पर संज्ञान लिया है और हल्का पटवारी व राजस्व निरीक्षक को जांच के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार ने भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही विधिवत प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया जारी है और नियमों के दायरे में रहकर अवैध कब्जे को हटाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन कब तक इस जमीन को अवैध चंगुल से मुक्त कराकर ग्रामीणों को न्याय दिला पाता है।
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