Petrol Diesel Price : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी के बाद से ही भारतीय उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इसका असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों पर क्यों नहीं दिख रहा है। देश में ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने पीटीआई के साथ बातचीत में बताया कि भले ही वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के भाव में कमी आई है, लेकिन अभी भी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास उस कच्चे तेल का स्टॉक है, जिसे उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के चरम के दौरान बेहद ऊंची कीमतों पर खरीदा था। इन कंपनियों को अभी उसी महंगे क्रूड को प्रोसेस करने में समय लग रहा है।

तेल कंपनियों का वित्तीय घाटा: ₹74,781 करोड़ की भारी मार
केंद्रीय मंत्री ने सरकारी तेल कंपनियों का वित्तीय लेखा-जोखा पेश करते हुए एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भारत सरकार ने आम जनता को महंगाई की सीधी मार से बचाने के लिए एक रणनीतिक निर्णय लिया। इस दौरान तेल कंपनियों ने ईंधन को उसकी वास्तविक लागत से कम कीमत पर बेचा। इस जन-कल्याणकारी कदम के कारण, 30 जून तक की अवधि में तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों को स्थिर रखने या कम करने के कारण कुल ₹74,781 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनियों के इसी घाटे की भरपाई और पहले से खरीदे गए महंगे स्टॉक के कारण तत्काल प्रभाव से कीमतों में कटौती संभव नहीं हो पा रही है।

वित्तीय तंत्र ने सोखा कीमतों का झटका: मंत्री पुरी का दावा
हरदीप सिंह पुरी ने आंकड़ों के जरिए बताया कि साल 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58% और डीजल में 6.23% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे मजबूत वित्तीय तंत्र और सरकार की नीति ने कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल को खुद सोख लिया, ताकि भारतीय उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मार्च से जून तक के संकटग्रस्त महीनों के दौरान देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की कमी नहीं हुई। बिना किसी व्यवधान या पेट्रोल पंपों पर कतारों के पूरे देश में ईंधन की सुचारू आपूर्ति जारी रही, जो सरकार की सफल प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।
भविष्य की उम्मीद: क्या जल्द राहत मिलेगी आम जनता को?
जब केंद्रीय मंत्री से यह सवाल पूछा गया कि क्या निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की जाएगी, तो उन्होंने एक सकारात्मक संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा कम कीमतें अगले कुछ और हफ्तों तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो ईंधन की कीमतों में कटौती पर विचार करना एक वैध और तर्कसंगत कदम होगा। मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट है कि यदि वैश्विक नरमी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, तो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में देश की आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
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