Bankipur Bypoll : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘जन सुराज’ पार्टी के प्रमुख और रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में प्रशांत किशोर स्वयं उम्मीदवार हो सकते हैं। इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाने के लिए शुक्रवार को पार्टी की कोर कमिटी की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो यह पहला अवसर होगा जब पीके (प्रशांत किशोर) खुद एक उम्मीदवार के तौर पर जनता के बीच वोट मांगते नजर आएंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि बांकीपुर की जनता और कार्यकर्ताओं की प्रबल इच्छा है कि वे इस चुनावी दंगल में खुद उतरें।

बांकीपुर उपचुनाव का कार्यक्रम: नामांकन से मतगणना तक की समय-सारणी
भारत निर्वाचन आयोग ने बांकीपुर समेत देश की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत 6 जुलाई से नामांकन दाखिल करने के साथ होगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि 13 जुलाई तय की गई है, जबकि नाम वापस लेने की प्रक्रिया 16 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। चुनावी संग्राम का निर्णायक दिन 30 जुलाई होगा, जब मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अंततः, 3 अगस्त को मतगणना के साथ ही परिणाम घोषित किए जाएंगे। बांकीपुर की यह सीट भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उनके इस्तीफे से रिक्त हुई है।

भाजपा का मजबूत किला और विपक्ष की चुनौती
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का पारंपरिक और अत्यंत मजबूत गढ़ रही है। 1995 से ही इस सीट पर भाजपा का एकछत्र राज रहा है। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन ने इस सीट पर लगातार जीत हासिल की है। अब इस रिक्त सीट को भरने के लिए जहाँ भाजपा अपनी साख बचाने के प्रयास में है, वहीं प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी इसे भाजपा के वर्चस्व को चुनौती देने के एक अवसर के रूप में देख रही है। इसके अलावा, तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) ने सामाजिक कार्यकर्ता वीना मानवी को अपना उम्मीदवार घोषित कर मुकाबले को और भी त्रिकोणीय बना दिया है।
राजनीतिक महत्व: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बड़ी परीक्षा
यह उपचुनाव न केवल बांकीपुर की राजनीति के लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक लिटमस टेस्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल के बाद यह पहला विधानसभा उपचुनाव है, जिसे उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर इन दिनों क्षेत्र में सघन जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं और लगातार मतदाताओं से संवाद कर रहे हैं। वे सरकार की नीतियों को लेकर लोगों को जागरूक करने और विकल्प प्रदान करने की बात कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशांत किशोर का ‘जन सुराज’ मॉडल भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे इस दुर्ग को ढहाने में सफल होगा। 3 अगस्त के नतीजे ही तय करेंगे कि बिहार में नया राजनीतिक समीकरण क्या आकार ले रहा है।
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