Janjgir-Champa Road Protest: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के डोंगाकोहरौद गांव के निवासियों के लिए शुक्रवार का दिन एक बड़ी उम्मीद लेकर आया। पिछले 15 वर्षों से जर्जर और खस्ताहाल सड़क से जूझ रहे ग्रामीणों ने आखिरकार अपनी मांगों को लेकर एक सफल आंदोलन किया। सड़क की बदहाली से तंग आकर गांव की महिलाओं ने मोर्चा संभाला और शुक्रवार सुबह 10 बजे पामगढ़ के अंबेडकर चौक पर जोरदार चक्काजाम कर दिया। इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका महिला नेतृत्व रहा। ग्रामीणों को स्थानीय व्यापारियों का भी पूर्ण समर्थन मिला, जिन्होंने अपनी दुकानें और बाजार बंद रखकर इस संघर्ष में एकजुटता दिखाई। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी बरसों पुरानी मांग को दोहराया।

प्रशासनिक अडिगता और भारी बारिश का साहस
प्रदर्शन के दौरान मौसम ने भी ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा ली। मूसलाधार बारिश होने के बावजूद महिलाएं और गांव के अन्य प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से लंबी बातचीत की। सुबह से शुरू हुआ यह चर्चा का दौर शाम 7 बजे तक खिंचा। ग्रामीणों की जिद और जायज मांगों के सामने आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। एडिशनल कलेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारियों के सामने आकर सरकार की ओर से मिलने वाले आश्वासनों की घोषणा की, जिसके बाद ही चक्काजाम समाप्त हुआ।

प्रशासन और ग्रामीणों के बीच चार सूत्रीय सहमति
जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लिखित सहमति दी है। प्रशासन ने सड़क की तत्काल मरम्मत के लिए ग्राम पंचायत को 29 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया है और यह कार्य आरईएस (RES) विभाग के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सड़क पर भारी वाहनों के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया गया है। भविष्य की ठोस कार्ययोजना के तहत, सड़क निर्माण की समस्त प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि प्रशासकीय स्वीकृति मिलते ही इस वर्ष दिसंबर माह से मुख्य सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा।
युवाओं का अनशन और सामान्य होती स्थिति
सड़क संघर्ष में डोंगाकोहरौद के युवाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जो चक्काजाम के साथ-साथ आमरण अनशन पर भी बैठे थे। प्रशासन से मिले सकारात्मक आश्वासनों के बाद, महिलाओं ने अनशनरत युवाओं को आंदोलन समाप्त करने के लिए प्रेरित किया। एडिशनल कलेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि प्रशासन निरंतर ग्रामीणों और प्रतिनिधिमंडल के संपर्क में है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। इस जीत के बाद पामगढ़ का बाजार देर शाम से धीरे-धीरे सामान्य रूप से खुलने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन द्वारा दिए गए समय-सीमा का इंतजार करेंगे और यदि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। यह जीत गांव के सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।
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