Chintan Shivir 3.0 : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ शुरू हो गया है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर और सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को मात्र विचार-विमर्श का मंच न बताते हुए इसे सरकार की कार्यसंस्कृति में सुधार और नवाचार का एक सशक्त माध्यम करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शिविर का ध्येय आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के लिए एक दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है।

सुशासन के लिए मूल्य-आधारित नेतृत्व पर मंथन
चिंतन शिविर के पहले दिन नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां और कृषि समृद्धि जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों को मूल्य-आधारित नेतृत्व और भावनात्मक संतुलन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि सेवा-भाव और संवेदनशील प्रशासन ही प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी नींव है। सीएम साय ने इस बात पर जोर दिया कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता और जनता के सरोकारों को केंद्र में रखकर ही ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के अनुरूप ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का निर्माण संभव है।

तकनीक और एआई (AI) के माध्यम से प्रशासन में दक्षता
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने शिविर में ‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज’ पर अपने विचार रखते हुए एआई (AI) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा-आधारित शासन प्रणाली को अपनाकर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक दक्ष बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी सेवा वितरण में तेजी आएगी और रोजगार सृजन के साथ-साथ डिजिटल समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, कृषि सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और बाजार संपर्क जैसे मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सके।
पूर्व शिविरों की उपलब्धियां और भविष्य की राह
मुख्यमंत्री साय ने रेखांकित किया कि पिछले दो चिंतन शिविरों के सुझावों को धरातल पर उतारने से प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आए हैं। मंत्रालय में लागू की गई ‘ई-ऑफिस’ प्रणाली ने फाइलों के निपटारे को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और ‘सेवा सेतु’ जैसे नवाचार आज जनता के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे त्वरित लाभ मिल रहा है।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए नई नीति-निर्माण
शिविर के समापन सत्रों में लिए जाने वाले निर्णय भविष्य की प्रशासनिक दिशा तय करेंगे। सीएम साय ने आश्वस्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। सरकार का संकल्प है कि ज्ञान, नवाचार और प्रभावी नीति-निर्माण के माध्यम से छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाए। यह चिंतन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि शासन का हर निर्णय अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसे सशक्त बनाए। सरकार की यह कवायद निश्चित रूप से राज्य के भविष्य को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Read More : Chhattisgarh Weather : छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर, अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का बड़ा अलर्ट जारी












