Bulldozer Action : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में वन विभाग की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने शनिवार को सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की। डीएफओ के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए वन विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुँचकर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान विभाग ने तीन पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया, जबकि अन्य 15 मकान मालिकों को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई वन क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से की गई, लेकिन इसके चलते स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया।

स्थानीय लोगों का आक्रोश और जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप
बुलडोजर की कार्रवाई शुरू होते ही प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। पीड़ितों का आरोप है कि विभाग ने उन्हें अपना सामान निकालने या मकान खाली करने तक का भी पर्याप्त समय नहीं दिया, जिससे उनकी गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि तत्काल मौके पर पहुँचे। उन्होंने कलेक्टर से इस तोड़फोड़ को रोकने का आग्रह किया। जन दबाव को देखते हुए कलेक्टर के हस्तक्षेप पर चाम्पा एसडीएम पवन कोसमा मौके पर पहुँचे और वन विभाग को फिलहाल कार्रवाई रोकने के आदेश दिए। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जमीन वन विभाग की है और अतिक्रमण हटाना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए इसे अभी रोका गया है।

आश्रयहीन हुए परिवार और प्रशासन की चुनौती
अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद बेघर हुए परिवारों के सामने अब सिर छुपाने का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित सुनीता सूर्यवंशी जैसे अन्य निवासियों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की कमाई लगाकर ये आशियाने बनाए थे, जिन्हें विभाग ने चंद मिनटों में ढहा दिया। अब ये परिवार अपना सामान लेकर पास के यात्री शेड में शरण लेने को मजबूर हैं। पूर्व पंच प्रमोद कुमार ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन घरों को तोड़ा गया है, उनमें से सात मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि ये अवैध थे, तो सरकार ने इन्हें आवास योजना का लाभ कैसे दिया? उनका कहना है कि बेदखली से पहले प्रशासन को इन गरीब परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
राजनीतिक दलों ने भी जताया कड़ा विरोध
वन विभाग की इस कार्रवाई का कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक सुर में विरोध किया है। नेताओं का कहना है कि शासन की अस्पष्ट नीतियों के कारण गरीब परिवार पिस रहे हैं। कांग्रेस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि इन परिवारों को उजाड़ने की प्रक्रिया जारी रही, तो वे बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। बीजेपी नेताओं ने भी प्रशासन से मानवीय आधार पर सोचने की अपील की है। फिलहाल, क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन के आगामी कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं। प्रशासन के सामने अब अतिक्रमण हटाने और इन विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।
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