Chandrima Bhattacharya : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में राज्य की पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर हलचल मचा दी है। चंद्रिमा ने अपने इस कदम के पीछे का मुख्य कारण पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा उन पर की गई टिप्पणी को बताया है। समाचार एजेंसी ANI के साथ बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि शुक्रवार को तृणमूल भवन में हुए घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें फोन किया और आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी दफ्तर विद्रोही गुट को सौंप दिया है। यह आरोप चंद्रिमा के लिए बेहद पीड़ादायक था, क्योंकि उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा के साथ पार्टी की सेवा की थी।

निष्ठा पर सवाल: इस्तीफे का तात्कालिक कारण
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भावुक होते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने दशकों तक ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा साबित की हो, उसकी ईमानदारी पर सवाल उठना उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब मेरी वफादारी पर ही संदेह किया जाने लगा, तो पार्टी के शीर्ष पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं बचा था।” जून 2026 में प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाली चंद्रिमा ने न केवल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, बल्कि पार्टी के सभी बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) और चुनाव आयोग के समक्ष अधिकृत प्रतिनिधि के पद से भी खुद को अलग कर लिया है। भारी मन से लिए गए इस फैसले ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।

सत्ता का संघर्ष और टीएमसी में बढ़ती गुटबाजी
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। संगठन और पार्टी की संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर विभिन्न गुट आमने-सामने हैं। इस्तीफा देने के तुरंत बाद चंद्रिमा का ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट की बैठक में शामिल होना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब वह बागी खेमे के साथ खड़ी हैं। चंद्रिमा ने अपने कार्यकाल की कड़वी यादें साझा करते हुए यह भी दावा किया कि वित्त राज्य मंत्री रहते हुए भी उन्हें कभी राज्य के बजट की तैयारी में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बजट भाषण की जानकारी उन्हें अंतिम समय में मिलती थी, जिसे उन्होंने अपनी वफादारी के कारण इतने समय तक छिपाए रखा।
गोपनीयता की शपथ का सम्मान और भविष्य की राह
यद्यपि चंद्रिमा ने पार्टी छोड़ दी है, लेकिन उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति अब भी सर्वोच्च सम्मान व्यक्त किया है। उन्होंने साफ कहा कि एक पूर्व मंत्री होने के नाते वह सरकार से जुड़ी कई गोपनीय बातें सार्वजनिक कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी शपथ का मान रखा। चंद्रिमा ने कहा कि वह अब और अधिक खुलासे नहीं करना चाहतीं। फिलहाल, उनका इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। ममता बनर्जी के करीबी रहे नेताओं का इस तरह पार्टी से बाहर जाना यह दर्शाता है कि टीएमसी के भीतर का असंतोष अब किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट दे रहा है।
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