Ram Mandir Donation Csae : अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की गिनती के दौरान हुई चोरी की घटना ने मंदिर प्रशासन को सुरक्षा तंत्र में व्यापक बदलाव करने के लिए मजबूर कर दिया है। चोरी की इस शर्मनाक घटना को गंभीरता से लेते हुए अब मंदिर के काउंटिंग रूम में नई और सख्त कार्यप्रणाली लागू की गई है। अब नोटों की गिनती पारंपरिक टेबल-कुर्सी पर नहीं, बल्कि फर्श पर गद्दे और प्लाईवुड बिछाकर की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी नोट नीचे न गिरे या छुपाया न जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों के आपसी संवाद पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

मंदिर प्रशासन अब प्रत्येक कर्मचारी की हर गतिविधि पर बारीक नजर रख रहा है, जिसमें बार-बार शौचालय जाने वाले कर्मचारियों की निगरानी भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, कैंटीन में कर्मचारियों के अधिक समय व्यतीत करने पर भी रोक लगा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की संभावना को खत्म किया जा सके।

सीसीटीवी और मॉनिटरिंग रूम की कमान
मंदिर के काउंटिंग रूम की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को अब सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में ले लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मॉनिटरिंग रूम को भी अधिक सक्रिय कर दिया गया है। विशेष आदेश जारी किए गए हैं कि मॉनिटरिंग रूम में तैनात कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान एक पल के लिए भी अपनी जगह नहीं छोड़ेंगे। उन्हें हर समय सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि दान की गिनती के दौरान हर छोटी गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इस सुरक्षा घेरे का एकमात्र उद्देश्य दान की गिनती में पूर्ण पारदर्शिता लाना और भविष्य में किसी भी प्रकार की चोरी या अनियमितता को पूरी तरह से रोकना है। मंदिर समिति का स्पष्ट मानना है कि आस्था के इस केंद्र में दान की पवित्रता और सुरक्षा सर्वोपरि है।
जेल में बंद 5 आरोपियों से पुलिस की पूछताछ
दान चोरी के इस मामले में पुलिस की जांच अब अपने निर्णायक दौर में है। हालिया जानकारी के अनुसार, अयोध्या पुलिस की एक विशेष टीम आज जिला कारागार पहुँचने वाली है। अदालत के विशेष आदेश के बाद, पुलिस जेल में बंद पांचों आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी। यह पूछताछ उन तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित होगी, जो अब तक की जांच और मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की रिमांड के दौरान सामने आए हैं।
पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस चोरी में क्या कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है या यह कुछ कर्मचारियों की सोची-समझी साज़िश थी। जेल में होने वाली यह पूछताछ मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जिससे इस घटना के पीछे की असली साजिश और अन्य सहयोगियों के नाम उजागर होने की उम्मीद है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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