Ram Mandir Row : विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े वित्तीय विवादों और चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने अयोध्या के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) आशुतोष तिवारी को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले की जांच के दायरे को और अधिक व्यापक और गहन बनाने का आग्रह किया है। विहिप का मानना है कि मंदिर जैसे पवित्र और संवेदनशील विषय पर सार्वजनिक मंचों से गंभीर आरोप लगाने वाले नेताओं से पूछताछ करना न्यायसंगत और आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

जांच के दायरे में प्रमुख विपक्षी नेता
विहिप अध्यक्ष द्वारा लिखे गए पत्र में चार प्रमुख नेताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिन्होंने समय-समय पर टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और सार्वजनिक जनसभाओं में राम मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवादित बयान दिए हैं। इन नेताओं में प्रो. राम गोपाल यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं। इन हस्तियों ने मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय भ्रष्टाचार को लेकर ₹200 करोड़ से लेकर ₹20,000 करोड़ तक के बड़े-बड़े दावे किए हैं। विहिप का तर्क है कि इतने भारी-भरकम और गंभीर आरोप बिना किसी ठोस आधार के नहीं लगाए जा सकते, इसलिए इनकी सत्यता की जांच होना अनिवार्य है।

SIT से साक्ष्यों और स्रोतों की गहन मांग
विहिप ने जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) से मांग की है कि वह इन नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाए। विहिप ने कुछ विशिष्ट प्रश्न उठाए हैं, जिनका उत्तर मिलना आवश्यक है: इन नेताओं के पास अपने आरोपों का आधार क्या है? उन्हें यह जानकारी या डेटा किस स्रोत से प्राप्त हुआ? क्या उनके पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेज, रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं? पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चूंकि सांसद संजय सिंह पहले ही SIT के सामने पेश हो चुके हैं और भूमि खरीद संबंधी दस्तावेज सौंप चुके हैं, इसलिए उनके उस विशेष मामले पर कोई नई टिप्पणी नहीं की गई है।
प्रियंका गांधी के बयानों पर विशेष टिप्पणी
पत्र में प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा दिए गए बयानों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने यह सवाल उठाया था कि क्या केवल छोटे स्तर के कर्मचारी हजारों करोड़ के चढ़ावे में हेराफेरी करने में सक्षम हैं, या इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या ‘बड़े लोगों’ की मिलीभगत है? विहिप ने इस प्रकार के संदेहों को निराधार बताते हुए मांग की है कि यदि यह आरोप महज एक राजनीतिक स्टंट है, तो इसका पर्दाफाश होना चाहिए।
झूठे आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अंत में, विहिप ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि लगाए गए आरोप जानबूझकर झूठे, लापरवाही से भरे या बिना किसी तथ्य के लगाए गए हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विहिप का मानना है कि जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने के लिए इन नेताओं के पास मौजूद दस्तावेजों का विश्लेषण करना चाहिए। यदि आरोप सही हैं तो दोषियों को सजा मिले, और यदि वे गलत हैं, तो झूठा प्रचार करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाना चाहिए ताकि भविष्य में धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों की साख के साथ खिलवाड़ न हो।












