Balod News : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़भूम परिसर में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। यहां स्कूल परिसर में लगे 29 हरे-भरे पेड़ों को बिना किसी सरकारी अनुमति के बेरहमी से काट दिया गया। इस गंभीर कृत्य की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के कड़े निर्देशों के बाद अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने गुरुर थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया है, वहीं मुख्य आरोपी प्रधान पाठक के खिलाफ निलंबन की अनुशंसा भी भेज दी गई है।

कलेक्टर की सख्ती और जांच में हुई पुष्टि
पेड़ों की अवैध कटाई की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। कलेक्टर के निर्देश पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर ने 2 जुलाई 2026 को विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। अपनी जांच में उन्होंने पाया कि पेड़ों की कटाई की शिकायतें पूरी तरह सत्य थीं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विद्यालय प्रबंधन ने नियमों का घोर उल्लंघन किया है और अपने पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग किया है। बीईओ ने बताया कि इस लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।

शाला विकास समिति की भूमिका पर उठे सवाल
जांच के दौरान यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस पूरी घटना की पटकथा 23 अप्रैल 2026 को ही लिखी गई थी। उस दिन आयोजित शाला विकास समिति की एक बैठक में मनमाने ढंग से पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया था। आरोप है कि इस अवैध कार्य को अंजाम देने की मुख्य जिम्मेदारी समिति के अध्यक्ष जीवन लाल उईके और सदस्य निर्मला उईके को सौंपी गई थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी परिसर की अमूल्य संपत्ति को नष्ट करने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के यह प्रस्ताव कैसे पास हुआ?
प्रधान पाठक और सचिव की मिलीभगत से कटवाए गए पेड़
पूरी जांच में माध्यमिक स्तर के प्रधान पाठक और शाला विकास समिति के सचिव डोमर सिंह निषाद की भूमिका मुख्य रूप से संदिग्ध पाई गई है। उन्हीं की देखरेख और सीधे निर्देशों के तहत परिसर में मौजूद 29 पेड़ों को कटवाकर ठिकाने लगा दिया गया। नियमानुसार, किसी भी सरकारी परिसर से पेड़ काटने के लिए वन विभाग या राजस्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है, परंतु इस मामले में किसी भी दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया गया। यह पूरी तरह से प्रशासनिक नियमों और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है।
एफआईआर और निलंबन की प्रक्रिया हुई तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 जुलाई को बीईओ गुरुर ने स्थानीय पुलिस थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही, आरोपी प्रधान पाठक डोमर सिंह निषाद और इस कृत्य में शामिल अन्य कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों के पास भेज दिया गया है। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी संसाधनों और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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