Raipur Railway Station : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मानसून की शुरुआती बारिश ने न केवल शहर की सड़कों का बुरा हाल कर दिया है, बल्कि रेलवे स्टेशन की जर्जर व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। वैसे तो बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन रायपुर रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के लिए यह किसी बड़ी आफत से कम नहीं रही। प्लेटफॉर्म नंबर-1 का नजारा किसी झरने जैसा हो गया, जहां स्टेशन की छत से पानी की तेज बौछारें इस कदर गिरने लगीं कि वहां मौजूद यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान ढूंढना भी मुश्किल हो गया। इस घटना ने रेलवे प्रशासन के दावों और स्टेशन के रखरखाव की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शेड बना मुसीबत, छत से गिरने लगा झरने जैसा पानी
प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाया गया शेड पानी रोकने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय खुद पानी का स्रोत बन गया। बारिश शुरू होते ही शेड के विभिन्न हिस्सों से पानी की मोटी धाराएं गिरने लगीं, जिससे प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जो यात्री तेज बारिश से बचने के लिए शेड के नीचे आश्रय लिए हुए थे, वे अचानक हुई इस ‘आर्टिफिशियल बारिश’ के कारण पूरी तरह भीग गए। स्थिति इतनी खराब हो गई कि लोगों को अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।

बुजुर्गों और बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
इस अव्यवस्था के कारण प्लेटफॉर्म पर मौजूद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। प्लेटफॉर्म पर पानी के तेज बहाव और शेड से गिरते पानी के कारण फर्श फिसलन भरा हो गया, जिससे यात्रियों के लिए संभलकर चलना एक बड़ी चुनौती बन गया। ट्रेनों के आने-जाने के दौरान यात्रियों को कोच तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। फिसलन के कारण किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना रहा, जिससे यात्रियों में प्रशासन के प्रति काफी आक्रोश देखा गया।
रेलवे के दावों और मानसून तैयारियों की खुली हकीकत
हर साल मानसून के आगमन से पूर्व भारतीय रेलवे बड़े-बड़े दावे करता है कि स्टेशन परिसरों में रखरखाव, छत की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया गया है। हालांकि, रायपुर स्टेशन की यह घटना उन तमाम दावों की हवा निकालती नजर आई। शेड की बदहाल स्थिति और जल निकासी की लचर व्यवस्था ने रेलवे के मेंटेनेंस सिस्टम की हकीकत जनता के सामने उजागर कर दी है। स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी लापरवाही न केवल यात्रियों की असुविधा का कारण बनती है, बल्कि रेलवे के प्रबंधन पर भी बड़े प्रश्नचिह्न लगाती है।
भविष्य के लिए प्रशासनिक जवाबदेही और सतर्कता जरूरी
रायपुर रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजी दावे ही काफी नहीं हैं, बल्कि धरातल पर कड़े निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। यात्रियों ने मांग की है कि प्रशासन को मानसून के इस सीजन में तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। अधिकारियों को अब इस मामले की गहन जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से कोई समझौता न हो सके।
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