Chhattisgarh Politics : रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल ला दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। एक तरफ भाजपा इसे सरकारी भूमि को संगठित अतिक्रमण से मुक्त कराने का एक वैध प्रशासनिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे गरीबों के प्रति ‘अमानवीय और क्रूर’ कार्रवाई करार दिया है।

कांग्रेस न केवल मुख्यमंत्री से माफी की मांग कर रही है, बल्कि आवास मंत्री ओपी चौधरी की बर्खास्तगी के लिए भी दबाव बना रही है। इस विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जहां दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने के आरोप लगा रही हैं।

भाजपा का तर्क: संगठित अतिक्रमण और पुनर्वास की व्यवस्था
छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने भाजपा का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल करीब 3 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर की गई है। उन्होंने कांग्रेस के उन दावों को खारिज किया कि पूरा गांव उजाड़ दिया गया है। सिंहदेव ने बताया कि कुछ लोगों ने 29 हजार वर्गफीट तक की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया था, जिसे हटाना आवश्यक था।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रभावित 66 परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 में व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जहाँ बिजली-पानी जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। भाजपा# रायपुर नकटी अतिक्रमण: भाजपा-कांग्रेस के बीच छिड़ी तीखी राजनीतिक जंग
नकटी अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई पर गरमाया छत्तीसगढ़ का राजनीतिक माहौल
रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक भीषण विवाद को जन्म दे दिया है। भाजपा सरकार इसे सरकारी भूमि को संगठित अतिक्रमण से मुक्त कराने का एक साहसी और अनिवार्य कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे गरीबों के आशियानों को बुलडोजर से उजाड़ने वाली अमानवीय और पूरी तरह से अवैध कार्रवाई करार दे रही है।
इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है, साथ ही आवास मंत्री ओपी चौधरी की बर्खास्तगी का दबाव भी बनाया है।
भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस फैला रही है अराजकता का झूठा नैरेटिव’
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कांग्रेस के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि नकटी गांव को उजाड़ने का दावा सरासर झूठ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित भूमि कुल आबादी का एक छोटा हिस्सा है, जहां 3 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर करीब 66 परिवारों ने संगठित रूप से कब्जा कर रखा था।
भाजपा ने जोर देकर कहा कि पुनर्वास के लिए नवा रायपुर के सेक्टर-30 में सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवास आवंटित किए गए हैं, जहाँ पहले से ही 1200 परिवार सम्मानपूर्वक रह रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायक आवास का नैरेटिव पूरी तरह फर्जी है, क्योंकि इस स्थान पर निर्माण का कोई भी निर्णय एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा लिया जाता है और वर्तमान में यह भूमि राजस्व विभाग के अधीन है।
कांग्रेस का आक्रोश: ‘गरीबों को उजाड़कर मंत्री ने किया पाप’
कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार अपनी कार्रवाई का पाप नहीं धो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ओपी चौधरी ने स्वयं माना है कि उस स्थान पर विधायक आवास बनाए जाने की योजना है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि कोई योजना नहीं थी, तो आनन-फानन में बारिश के मौसम में गरीबों के घरों को क्यों तोड़ा गया?
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को नियम विरुद्ध बताते हुए कहा कि विस्थापन के लिए लोगों को अपना सामान हटाने तक का समय नहीं दिया गया। पार्टी का आरोप है कि पुनर्वास के लिए जो जगह दी गई है, वह न केवल बहुत दूर है, बल्कि वहां मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है।
विवादों के घेरे में पुनर्वास और मुआवजे की मांग
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि तोड़े गए मकानों का निर्माण उसी स्थान पर दोबारा कराया जाए और विस्थापित परिवारों को हुए आर्थिक नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि आवंटित अस्थायी मकानों के लिए 5.50 लाख से 8.50 लाख रुपये तक की कीमत क्यों तय की गई है? इसे पूरी तरह मुफ्त क्यों नहीं किया गया? कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपनी तानाशाही और अमानवीय रवैये को नहीं बदलती है, तो वे कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सरकार बनाम विपक्ष: राजनीतिक भविष्य की लड़ाई
नकटी गांव की यह घटना अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक वर्चस्व की एक बड़ी लड़ाई बन गई है। जहां भाजपा इसे ‘सरकारी जमीन बचाने’ का संकल्प बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘सत्ता के अहंकार’ के रूप में पेश कर रही है। बलौदाबाजार जैसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासन और सरकार पूरी तरह सतर्क है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार कांग्रेस की मांगों को मानेगी या आने वाले समय में यह संघर्ष और भी अधिक उग्र रूप धारण करेगा।
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