Surguja Conflict: छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के सीतापुर में दो समुदायों के बीच विवाद के कारण तनाव की स्थिति बन गई है। इस विवाद की शुरुआत 29 नवंबर को एक शादी समारोह में हुई थी, जो तीन दिनों तक चला और अंततः एक बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया। घटना के बाद पुलिस द्वारा एकपक्षीय कार्रवाई से नाराज़ उरांव समाज ने नेशनल हाईवे पर चक्काजाम किया और आज (2 दिसंबर) नगर बंद का आह्वान किया। तनाव को देखते हुए सीतापुर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

Surguja Conflict: विवाद की शुरुआत और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई
सीतापुर में विवाद की शुरुआत 29 नवंबर की रात को हुई। सीतापुर उरांव पारा के रहने वाले अमन खेस जब एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे, तब उनका विवाद काराबेल के टोकोपारा निवासी निक्कू खान (जो टेंट लगाने का काम करता है) और महेश दास से हो गया। विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई। अगले दिन, 30 नवंबर को भी दोनों पक्षों में फिर मारपीट हुई।
दोनों पक्षों ने शिकायत थाने में दर्ज कराई। लेकिन, पुलिस ने केवल निक्कू खान की शिकायत पर अमन खेस और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की, जबकि अमन खेस की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
Surguja Conflict: तीन दिनों तक बढ़ा विवाद, उरांव पारा में हुड़दंग
विवाद सिर्फ दो दिनों तक सीमित नहीं रहा। पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई से नाराज़गी के बीच, 1 दिसंबर की रात को दूसरे पक्ष के युवकों ने लगभग 20 बाइक और स्कॉर्पियो में उरांव पारा पहुँचकर हुड़दंग मचाया और गाली गलौज की। इस घटना से भड़के उरांव समाज के लोगों ने देर रात सीतापुर थाने के सामने नेशनल हाईवे पर धरना दे दिया।
4 घंटे का चक्काजाम और देर रात तक प्रदर्शन
विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने के सामने जमा हो गए और सड़क पर बैठ गए। उरांव समाज ने 4 घंटे नेशनल हाईवे में चक्काजाम रखा, जिसके चलते नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ट्रकों और भारी वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदर्शनकारी रात करीब 1:30 बजे के बाद भी सड़क पर डटे रहे।
एसडीओपी राजेंद्र मंडावी ने उरांव समाज के लोगों को समझाने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज की जा रही है और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी होगी, लेकिन वे सड़क से उठने को तैयार नहीं हुए।
ASP के हस्तक्षेप से मामला शांत: नगर बंद का आंशिक असर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, देर रात करीब 12 बजे एडिशनल एसपी अमोलक सिंह मौके पर पहुँचे। पुलिस ने तनाव शांत करने के लिए मुस्लिम समाज के दर्जनभर युवकों को हिरासत में लिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
इस घटना के विरोध में उरांव समाज ने मंगलवार (2 दिसंबर) को नगर बंद का आह्वान किया है। सुबह नगर बंद का आंशिक असर रहा, लेकिन दोपहर में उरांव समाज ने नगर में रैली निकाली और नगर बंद कराया।
पुलिस की लापरवाही बनी विवाद की जड़
मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। उरांव पारा में उत्पात मचाने की सूचना मिलने पर गाड़ी नहीं होने के कारण पुलिस तत्काल मौके पर नहीं पहुँची। बाद में केवल दो आरक्षक पैदल पहुँचे। माना जा रहा है कि पुलिस की इसी लापरवाही और एकपक्षीय कार्रवाई के कारण पूरे मामले ने इतना तूल पकड़ लिया।
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