West Bengal News : बर्दवान जिले के बर्नपुर में रविवार का दिन स्थानीय निवासियों के लिए बेहद भावुक और दुखद साबित हुआ। बर्नपुर की पहचान और दशकों पुरानी स्मृतियों को संजोए रखने वाला लगभग 60 साल पुराना ऐतिहासिक सिनेमा हॉल, SAIL-ISP (इस्को स्टील प्लांट) द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान की भेंट चढ़ गया। बुलडोजर के जरिए इस इमारत को ढहाते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। यह केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं था, बल्कि इस पूरे इलाके के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक प्रमुख केंद्र था। वर्षों से बंद पड़े इस सिनेमा हॉल ने न जाने कितनी पीढ़ियों को मनोरंजन की सौगात दी थी, जिसके कारण स्थानीय निवासियों की इससे गहरी भावनात्मक आस्था और यादें जुड़ी हुई थीं।

बुजुर्गों की आंखों में छाई मायूसी: पुरानी यादों से जुड़ा था हॉल
जैसे ही बुलडोजर ने ऐतिहासिक इमारत की दीवारों को गिराना शुरू किया, वहां मौजूद बुजुर्गों की पुरानी यादें ताजा हो गईं। वरिष्ठ नागरिकों ने भावुक होते हुए साझा किया कि कैसे वे अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के साथ इस हॉल में पुरानी फिल्मों का आनंद लेने आते थे। एक बुजुर्ग ने कहा, “यह सिर्फ एक सिनेमा हॉल नहीं था, यह हमारी जवानी और उस दौर की बेफिक्र खुशियों का प्रतीक था।” इमारत के मलबे में तब्दील होते ही स्थानीय लोगों के चेहरे पर निराशा और पीड़ा साफ देखी जा सकती थी। लोगों का मानना है कि जो स्थान उनकी पहचान और इतिहास का हिस्सा था, उसे इस तरह से मिटा दिया जाना एक बड़ी सांस्कृतिक क्षति है, जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है।

सेल आईएसपी का कड़ा अभियान: अतिक्रमण मुक्त हो रही है जमीन
दरअसल, राज्य में आए राजनीतिक बदलाव के बाद से SAIL-ISP ने अपनी जमीन पर किए गए कथित अवैध कब्जों के खिलाफ एक व्यापक और सख्त अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत कंपनी अपनी भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कराने में जुटी है। इस प्रक्रिया में पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यालयों, स्थानीय क्लबों और अन्य छोटे-बड़े अवैध निर्माणों को निशाना बनाया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, यह सिनेमा हॉल भी इस्को स्टील प्लांट (SAIL-ISP) की अधिग्रहित जमीन पर स्थित था, जिसके कारण इसे हटाने का निर्णय लिया गया। यह अभियान बर्नपुर में तेजी से चल रहा है, जिसका उद्देश्य जमीन को पुन: कंपनी के नियंत्रण में लाना है।
जनहित बनाम प्रशासन: संरक्षण के बजाय ध्वस्तीकरण पर उठ रहे सवाल
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों के एक वर्ग में भारी रोष है। लोगों का तर्क है कि इतने वर्षों पुराने और ऐतिहासिक महत्व वाली इस इमारत को सीधे तौर पर ढहाने के बजाय प्रशासन को वैकल्पिक रास्ते अपनाने चाहिए थे। स्थानीय लोगों का सुझाव था कि इसे पूरी तरह तोड़ने के स्थान पर इसका संरक्षण (Conservation) किया जा सकता था। उनका मानना था कि यदि प्रबंधन चाहता तो इस इमारत को मरम्मत कर किसी सामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय या किसी अन्य जनहित के कार्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। फिलहाल, SAIL-ISP प्रबंधन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम और स्थानीय लोगों की भावनाओं को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है, जिससे विवाद और संशय की स्थिति बनी हुई है।
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